जागरण संवाददाता, वाराणसी : देश में ही नहीं पूरी दुनिया में जहा अंग्रेजी भाषा का बर्चस्व बढ़ता जा रहा है। वहीं विदेशियों में प्राच्य विद्या के गूढ़ रहस्यों को जानने की जिज्ञासा बढ़ रही हैं। इसका साक्षी है संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय। वर्तमान में रूस, इंग्लैंड, म्यामार, नेपाल सहित विभिन्न देशों के विदेशी छात्र भारतीय संस्कृति व संस्कृत को समझने व गुनने में जुटे हुए हैं। विश्वविद्यालय में विदेशी ही नहीं मुस्लिम महिलाएं भी संस्कृत ब्राच रही है।

रूस की प्रो. ओल्गा फापेल्को को भारतीय दर्शन ने इस कदर प्रभावित किया कि वह संस्कृत पढऩे के लिए रूस को छोड़कर भारत आ गई। रसीयन प्र्रेसिडेन्सियल एकेडमी ऑफ नेशन, मास्को रूस के असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुकी प्रो. ओल्गा वर्तमान में विश्वविद्यालय से तीन वर्षीय संस्कृत प्रमाणपत्रीय में डिप्लोमा कर रही है। उन्होंने बताया कि वह 2003 में पहली बार भारत घुमने आई थी। इसके बाद कई बार विभिन्न व्याख्यानों में भारत कई बार आना-जाना हुआ। धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति व दर्शन से लगाव बढ़ता गया। अंतत: प्राच्य विद्या को गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए संस्कृत विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रेशन कराने का निर्णय लिया। संस्कृत पढ़ने का मूल उद्देश्य सनातन धर्म का रूस में प्रचार करना, वेद में निहित प्राचीन ज्ञान विज्ञान को रूसी भाषा में ग्रंथ लिखना है ताकि रुस के लोग भी भारतीय दर्शन व ज्योतिष के बारे में जान सके। रूस में व भारत की सभ्यताओं में काफी समानताएं : उन्होंने बताया कि रूस व भारतीय संस्कृति व सभ्यता काफी समानता है। रूस में कई देवी-देवताओं के प्राचीन मंदिर हैं। रूस व संस्कृत के ग्रामर में भी काफी हद तक मिलते हैं। इस प्रकार दोनों देशों में काफी समानता है। दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ता का भी शायद यहीं कारण है। इन तमाम कारणों से भारतीय संस्कृति व संस्कृत को समझने की इच्छा हुई और संस्कृत पढ़ने काशी आ गई ताकि अध्ययन करने के बाद रूस में संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर सकूं। मुस्लिम भी पीछे नहीं : आम तौर पर लोग संस्कृत को पंडितों की भाषा समझ लेते हैं। इस मिथक को तोड़ रहीं हैं। मऊ की जेबा आफरीन। वह संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री कर रहीं हैं। उन्होंन आठ तक की शिक्षा मदरसा से हासिल की है। शास्त्री कर रही जेबा के परिवार वालों का संस्कृत से दूर-दूर तक नाता नहीं हैं। बावजूद जेबा न केवल संस्कृत सिखने व समझने में जुटी है ताकि मुस्लिम महिलाओं को संस्कृत के ज्ञान से परिचित कराया जा सके।

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