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    अमृत महोत्सव पर वाराणसी में वीरांगना रानी लक्ष्‍मीबाई को दी संगीतांजलि, शोभायात्रा में शामिल हुई झांकी

    By Saurabh ChakravartyEdited By:
    Updated: Fri, 19 Nov 2021 04:39 PM (IST)

    काशी की बेटी मनु को उनकी जयंती पर काशी के प्रबुद्ध जनों ने एक अलग ही तरह से श्रद्धांजलि अर्पित की। विख्यात संगीतकार सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्र ने सितार पर वंदेमातरम की धुन प्रस्तुत कर उनके श्री चरणों में नमन किया।

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    ख्यातिलब्ध सितारविद पंडित देवब्रत मिश्र ने राग भटियार में निबद्ध वंदे मातरम की अत्यंत मनमोहक धुन प्रस्तुत की।

    वाराणसी, जागरण संवाददाता। काशी की बेटी मनु को उनकी जयंती पर काशी के प्रबुद्ध जनों ने एक अलग ही तरह से श्रद्धांजलि अर्पित की। विख्यात संगीतकार सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्र ने सितार पर वंदेमातरम की धुन प्रस्तुत कर उनके श्री चरणों में नमन किया। अवसर था अमृत महोत्सव आयोजन समिति, मानस नगर, काशी द्वारा शुरू किए गए स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के प्रथम चरण के शुभारंभ का। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को अस्सी स्थित महारानी लक्ष्मी बाई की जन्मस्थली से हुआ जिसमें विविध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया।

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    इस अवसर पर आयोजित संगीत सभा में ख्यातिलब्ध सितारविद पंडित देवब्रत मिश्र ने राग भटियार में निबद्ध वंदे मातरम की अत्यंत मनमोहक धुन प्रस्तुत कर वीरांगना के चरणों में नमन किया। उनके साथ तबले पर रहे प्रशांत मिश्र ने तबले पर घोड़े के टापो की आवाज निकाल कर सबको अचंभित कर दिया। उनके साथ कृष्णा मिश्रा सितार पर रहे। इस अवसर पर आयोजित विद्वत सभा में नगर के कई गणमान्य विद्वानों ने विचार व्यक्त किया। मुख्य वक्ता उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक के निदेशक त्रिलोक शुक्ला ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के जरिये हम राष्ट्र के उन उन्नायकों के बारे में भी आने वाली पीढ़ियों से अवगत करा पा रहे है जिन्होंने स्वातंत्र संघर्ष में अपना बलिदान दिया। इसके अलावा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र एवं दिनेश पाठक ने भी विचार व्यक्त किया।

    इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं रानी लक्ष्मीबाई के प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। अंत मे विशाल शोभायात्रा भी निकाली गई जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दुर्गाकुण्ड पहुंच कर समाप्त हुई।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर कविता शाह, संयोजन केशव जालान, स्वागत डॉ. रजनीश उपाध्याय, संचालन प्रीतेश आचार्य तथा धन्यवाद ज्ञापन नवीन श्रीवास्तव ने दिया। इस मौके पर मोहिनी झँवर, बी.एस. सुब्रह्मण्यम मणि, भाऊ आचार्य तोड़पे, सीए आलोक मिश्र, राजमंगल पाण्डेय, सुबोध, ज्ञानेश्वर, हरीश वालिया, पवन शर्मा, जेपी सिंह, मांधाता मिश्र, गोविंद, जगन्नाथ ओझा आदि प्रबुद्ध जन शामिल रहे।