वाराणसी, जागरण संवाददाता। कलेक्ट्रेट भवन की दीवारें भले दो शताब्दी पुरानी हों लेकिन गणतंत्र दिवस पर जोश युवाओं सा नजर आया। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने झंडा फहराया। साथ ही अधिकारियों -कर्मचारियो़ं को संविधान की शपथ का एक बार फिर साक्षी बना । वास्तव में कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण 1820 में अंग्रेजों ने कराया था। अभिलेखागार माल के साथ ही अपर नगर मजिस्ट्रेट न्यायालयों के भवन वर्ष 1901 में बनाए गए। ऐसे में ये दोनों भवन क्रमश: 200 और 120 साल पुराने हैं। इस तरह यह भवन पुरातात्विक हो जाता है। हालांकि जल्द ही इसकी जगह पर जल्द ही नया भवन बनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। शासन व राजस्व परिषद की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर इन भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया जा चुका है। साथ ही नए भवन के निर्माण के लिए परिषद की ओर से राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था भी नामित किया गया है।

नए भवन के लिए राजकीय निर्माण निगम की ओर से जमीन की पैमाइश की जा चुकी है। साथ ही ले आउट प्लान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इसमें कलेक्ट्रेट भवन के लिए 4400 वर्ग मीटर भूमि की उपलब्धता बताई गई है। इसमें 3800 वर्गमीटर भूमि पर भवन का निर्माण किया जाएगा। हालांकि 0.201 हेक्टेयर जमीन उद्यान विभाग के कंपनी बाग से ली जाएगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव उद्यान को पत्र लिखा गया है।

वर्ष 2006 में 871 लाख रुपये का भेजा गया था प्रस्ताव

जीर्ण-शीर्ण हो चले दो शताब्दी प्राचीन कलेक्ट्रेट भवन ध्वस्त कर नया भवन बनाने के लिए 2006 में तत्कालीन सपा सरकार ने घोषणा की थी। उसी समय अफसरों ने 871 लाख रुपये का प्रस्ताव राजस्व बोर्ड व प्रदेश शासन को भेजा था। इसे मंजूरी भी मिली लेकिन कलेक्ट्रेट भवन का कायाकल्प नहीं हो सका।

60 कमरे होंगे नए भवन में

वर्ष 2016 में बनाए गए प्रस्ताव के अनुसार नए भवन में 60 कमरे बनाए जाएंगे। इसमें जिला स्तरीय समस्त प्रशासनिक अधिकारी एक साथ बैठ सकेंगे। इसके साथ ही रिकार्ड रूम व मीटिंग हाल भी बनाया जाएगा। यहां फरियादियों के सुविधाजनक तरीके से बैठने की भी व्यवस्था होगी।

Edited By: Saurabh Chakravarty