वाराणसी, (मुकेश चंद्र श्रीवास्तव)। रामनगर के पास राल्हुपुर में बना बंदरगाह अब रेलवे स्टेशन से कनेक्ट होगा। ताकि मालगाड़ी के माध्यम से आने वाले कंटेनर को आसानी से बंदरगाह तक पहुंचाया जा सके। इससे देश-विदेश से यहां आए कंटेनर को रेलवे के माध्यम से अन्य शहरों में भी भेजना भी आसान हो जाएगा। इसके लिए जीवनाथ पुर स्टेशन से मल्टी मॉडल टर्मिनल तक करीब सात किलोमीटर लाइन बिछाई जाएगी। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा इसके लिए रूट भी फाइनल कर लिया गया है। भूमि अधिग्रहण की भी प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 12 नवंबर 2018 को इस बंदरगाह का उद्घाटन किया गया था। इसका ट्रायल भी सफल हो चुका है। साथ ही यहां से जहाजों ने तीन यात्रा कर ली है। अब कंपनियां अपने अनुसार जहाज बनाने में जुट गई हैं। इसके बाद इलाहाबाद, वाराणसी, पटना जलमार्ग के जरिए आसाम के साथ ही बांग्लादेश तक माल भेजना और मंगाना आसान हो जाएगा। साथ ही हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेंगे। व्यवसाय को देखते ही रामनगर बंदरगाह के पास करीब 100 एकड़ में फ्रेट विलेज भी तैयार किया जा रहा है। इसके बन जाने से यहीं पर स्टोरेज, सैंपलिंग, मैन्युफैक्चरिग, पैकेजिंग आदि की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए जहाजरानी मंत्रालय की ओर से पिछले साल ही प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी। बताया जा रहा है कि इससे बड़ा फ्रेट विलेज झारखंड के साहेबगंज में बन रहा है। यहां का बंदरगाह पेशेवर लॉजिस्टिक्स उद्योग के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा। फ्रेट विलेज के मुख्य कार्य परिवहन के विभिन्न साधनों का प्रबंधन और उपयोगिता सुनिश्चित करना, उनमें तालमेल बिठाना और मौजूदा परिवहन साधन से भीड़भाड़ को कम करना होता है। माल ढुलाई संबंधी विभिन्न गतिविधिया एक ही छत के नीचे उपलब्ध होने और उनमें समन्वय से कारोबार आसान होगा है। साथ ही इससे ट्रक क्षमता का बेहतर उपयोग भी संभव हो पाएगा। इससे कारोबारी गतिविधियों एवं आर्थिक दक्षता में सुधार हो सकेगा। इसको लेकर पिछले दिनों विश्व बैंक की टीम ने निरीक्षण भी किया था। अब नए कार्य रेलवे स्टेशन से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता जारी होने के कारण कार्य की गति में ब्रेक लग गया है।

Posted By: Jagran

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