Raksha Bandhan Muhurat: काशी के विद्वान से जानें रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त, राखी बांधते समय इस मंत्र का करें उच्चारण
Raksha Bandhan 2024 Muhurat रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्राकाल की छाया रहेगी। पूर्णिमा रविवार की रात 218 बजे से लग गई जो सोमवार मध्य रात्रि 1229 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के साथ भद्रा भी लग गई जो सोमवार दोपहर 124 बजे तक रहेगी। दोपहर 124 बजे भद्रा समाप्ति के उपरांत भाइयों की कलाई पर बहनें रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सनातन धर्म के प्रमुख पर्व-त्योहारों में रक्षाबंधन का विशिष्ट स्थान है। यह पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। पूर्णिमा रविवार की रात 2:18 बजे से लग गई जो सोमवार मध्य रात्रि 12:29 बजे तक रहेगी।
पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के साथ भद्रा भी लग गई जो सोमवार दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी। भद्रा काल में रक्षा बंधन पूर्णतया शास्त्र विरुद्ध माना गया है। अतः दोपहर 1:24 बजे भद्रा समाप्ति के उपरांत भाइयों की कलाई पर बहनें रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
इस मंत्र का करना चाहिए उच्चारण
श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार रक्षा सूत्र बांधते समय ‘येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रों महाबल:। तेनत्वां बद्धनामि रक्षे माचल माचल।’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इससे रक्षा सूत्र का प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग में पूर्व अध्यक्ष प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री के अनुसार तिथि को लेकर काशी के लगभग सभी पंचांगों में एक जैसी स्थिति है। अतः 19 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे के बाद रक्षाबंधन पर्व मनाना धर्मशास्त्र के अनुकूल है।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य प्रो. नागेन्द्र पांडेय के अनुसार रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र ने दानवों का संहार किया और 12 वर्षों से लगातार पराजित हो रहे देवों को विजय मिली। यह तिथि श्रावण पूर्णिमा थी। उसी समय से सनातन धर्म में रक्षाबंधन पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई। तिथि विशेष पर बहनें भाइयों और पुरोहित यजमानों को रक्षा सूत्र बांधते हैं।
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