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पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मुगलसराय से रहा गहरा नाता, रेलवे जंक्शन पर मिला था शव

एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मुगलसराय से गहरा नाता था। वे अक्सर रेल मार्ग से पीडीडीयू नगर से गुजरते तो स्थानीय लोगों से मिलते। उनकी मौत के बाद शव पीडीडीयू नगर जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या एक के ट्रैक पर मिला था।

By Saurabh ChakravartyEdited By: Published: Sat, 25 Sep 2021 07:50 AM (IST)Updated: Sat, 25 Sep 2021 07:50 AM (IST)
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मुगलसराय से रहा गहरा नाता, रेलवे जंक्शन पर मिला था शव
पड़ाव को पंडित दीनदयाल का अंतिम पड़ाव मानकर भव्य संग्रहालय व 63 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा लगाई गई है।

चंदौली, विवेक दुबे। एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मुगलसराय से गहरा नाता था। वे अक्सर रेल मार्ग से पीडीडीयू नगर से गुजरते तो स्थानीय लोगों से मिलते। उनकी मौत के बाद शव पीडीडीयू नगर जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या एक के ट्रैक पर मिला था। नगर निवासी गुरुबख्श कपाही ने उनकी शिनाख्त की थी। मृत शरीर देखते ही फफक पड़े, बोले, अरे ये तो अपने दीनदयाल हैं। दीनदयाल की स्मृति में पड़ाव में संग्रहालय बना है। मुगलसराय जंक्शन और नगर का नाम बदलकर दीनदयाल के नाम पर रखा गया है।

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25 सितंबर 1916 में जन्मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय पूर्वोत्तर राज्यों में जाते वक्त स्थानीय जंक्शन पर कुछ देर के लिए रुकते थे। यहां के लोगों से बात करते थे। उन्हीं के एक साथी गुरुबख्श कपाही थे। वे उनसे भविष्य की योजनाओं के बारे में चर्चा भी करते थे। गुरुबख्श अपने परिवार व साथियों को यह बताते कि पंडित जी गरीबों के उत्थान के बारे में हमेशा चिंतित रहते हैं। अंत्योदय के सपने को साकार करने के लिए वे शुरू से ही लगे रहते थे। चूंकि उनका जीवन गरीबी में बीता, इसलिए वे गरीबों की पीड़ा से भलीभांति वाकिफ थे। इससे उनकी विचारधारा में हमेशा गरीब केंद्र में रहते थे। 11 फरवरी 1968 को दीनदयाल का पार्थिव शरीर स्थानीय जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या एक के यार्ड में पड़ा मिला था। उनकी पहचान करने वाला उस वक्त जंक्शन पर कोई नहीं था। गुरुबख्श कपाही ने ही उनके शव की पहचान की। तभी से स्थानीय जंक्शन को उनका अंतिम पड़ाव माना जा रहा। जिस स्थान पर उनका शव मिला था, रेलवे ने उसे संरक्षित किया है। उनके बारे में उन्नाव जिले के रहने वाले 80 वर्षीय ओमशंकर बताते हैं कि पंडित दीनदयाल अकेले यात्रा करने की अपनी अटल नीति पर आखिर तक अडिग रहे। ट्रेन में खाली समय लिखने में बिताते थे।

भारतीय जनसंघ के पहले महामंत्री रहे दीनदयाल की मौत का मामला पहले दबा रहा। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने की कवायद शुरू हुई। एकात्म मानववाद के प्रणेता की मौत के मामले की पड़ताल के लिए जीआरपी कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज है। पड़ाव को उनका अंतिम पड़ाव मानकर भव्य संग्रहालय व 63 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा लगाई गई है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वाल पर उनके विचारों व जीवन चरित्र को उकेरा गया है, ताकि लोग उनके विचारों को जानकर एकात्म मानवतावाद के सिद्धांतों से अवगत हो सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संग्रहालय का उद्घाटन किया था। उनकी जयंती के अवसर पर शनिवार को पड़ाव स्थित संग्रहालय में भाजपा के कद्दावर नेताओं का जमावड़ा होगा। इस दौरान विचार गोष्ठी समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित होंगे।


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