जागरण संवाददाता, वाराणसी। गंगा में बढ़ते जल स्तर को देखते हुए पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का का गेट खोल दिया गया है। यह कार्यवाही बिहार व उप्र को बढ़ा से बचाने के लिए की गई है। लगातार हो रही बारिश से गंगा की सहायक नदियां ऊफान पर हैं। ऐसे में उप्र के पूर्वांचल समेत बिहार में गंगा किनारे पानी बस्तियों में घुस गया है। हजारों गांवों का संपर्क टूट गया है तो रहनवार पलायन करने लगे हैं। हालात विषम होती जा रही है क्योंकि गंगा के जल स्तर में बढ़ाव लगातार बना हुआ है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार को रात आठ बजे बनारस में गंगा का जल स्तर 72.14 मीटर था। गंगा के ऊपरी जिलों की बात करें तो रात आठ बजे फाफामऊ 86.05 मीटर, प्रयागराज 85.31 मीटर व मीरजापुर 78.29 मीटर मीटर गंगा का जल स्तर था। इसमें खास यह कि गंगा के जल स्तर में बढ़ाव की गति रात तक सभी जिलों में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की दर से बनी रही। केंद्रीय जल आयोग के अनुमान के अनुसार गुरुवार की सुबह आठ बजे तक गंगा का जल स्तर 72.23 मीटर होगा। बशर्ते, जल स्तर में बढ़ाव एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से होती रहे। यदि बढ़ाव की रफ्तार बढ़ी हुआ या घटी तो अनुमानित जल स्तर के आकलन में भी बदलाव संभावित है।

एमपी व राजस्थान से बिगड़े हालात

एमपी व राजस्थान में हो रही बारिश से हालात बिगड़े हैं। एमपी की दो नदियां केन व बेतवा के अलावा राजस्थान से निकली चंबल नदी ने यमुना नदी का जल स्तर बढ़ा दिया है जिससे गंगा का जल स्तर बढ़ गया है। वहीं, पूर्वांचल में हो रही बारिश ने भी हालात विषम किए हैं। बरसाती नदियों के अलावा प्राकृतिक नालों से भारी मात्रा में पानी बह रहा है जो सीधे तौर पर गंगा के जल स्तर को बढ़ाने में सहयोगी बना है।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty