बनारस में न संडे न अवकाश, वीवीआइपी शहर होने का लोड झेल रहे अधिकारी चाह रहे हैं स्थानांतरण
वाराणसी शहर वीवीआइपी होने की वजह से यहां पर आए दिन पीएम सीएम मंत्री और शीर्ष अधिकारी के साथ ही विदेशी वीवीआइपी के अलावा देश के दिग्गज लोग बाबा दरबार तक में आ रहे हैं। उनके प्रोटोकाल को लेकर यहां के अधिकारी छुट्टी तक में काम करने को विवश हैं।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। जीवन के अंतिम समय मे सभी काशी आकर नश्वर शरीर से मुक्ति की राह तलाशते हैं लेकिन कर्मभूमि के रण में यहां के झंझावतों पर विजय पाने वालों की संख्या अब धीरे धीरे कम होती जा रही है। जी, यह बात हो रही है सरकारी अमले की। कभी काशी में नौकरी करने के लिए अधिकारी आतुर होते थे, यह उम्मीद लगाए रहते थे काशी में तबादला होने का मतलब 'बाबा' की सेवा का अवसर मिलना है लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब अधिकारी यहां तबादला नहीं चाहते हैं। किसी कारण से वाराणसी में तबादला हो गया तो एड़ी चोटी जोर लगाकर रोकवाने की कोशिश करते हैं। इसमे भी सफल न होने पर यहां आने के बाद तबादले की कोशिश में जुटे रहते हैं।
वाराणसी में आए कुछ अधिकारी तो पिछले दो साल से इसी कार्य मे जुटे हैं। कुछ तो सामान समेटकर बैठे हैं कि तत्काल यहां से मुक्ति मिले। इसमे छोटे से लगायत आला अधिकारी तक शामिल हैं। कुछ प्रोन्नति पा चुके हैं। उम्मीद हैं कि कहीं न कहीं पोस्टिंग मिलेगी ही। एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि भाई.. वाराणसी से सिर्फ मुक्ति मिल जाए, सरकार चाहे जहां इच्छा हो भेज दे। यहां न अपना सन्डे है, न ही अवकाश मिलना है। कब सुबह होगी, कब शाम होगी , पता नहीं। प्रतिदिन गणेश परिक्रमा करने वालों की यहां जुटान रहती है। आसपास के जिले में कोई समीक्षा करने तक नहीं जाता है।
काशी में नौकरी करना कठिन नहीं। कठिन वीवीआइपी को झेलना है। जब प्रतिदिन समीक्षा होगी तो काम कब होगा। बहुतायत अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्य की फाइलें तक निस्तारित नहीं हो पा रही हैं। राजस्व विभाग की सर्वाधिक स्थित खराब है। अधिकारियों का कहना है सिर्फ सुबह से शाम तक एक ही कार्य वीआईपी सेवा। कभी कोई मंत्री तो कभी कोई आला अधिकारी। दर्शन पूजन व खरीदारी कराना ही एकमात्र नौकरी रह गई है। सबकी नौकरी करते करते अधिकारी खुद का काम तक नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में काम के अतिरिक्त का लोड ले रहे अधिकारी अब यहां से मुक्ति पाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं।
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