वाराणसी, जेएनएन। रामनगर के राल्हूपुर में मल्टी मॉडल टर्मिनल जरूर शुरू कर दिया गया लेकिन उसका फायदा व्यापारी नहीं ले पा रहे हैं। अब तक मात्र 281.8 मीट्रिक टन ही माल आया और गया। व्यापारी समय व किराया अधिक होने का हवाला देकर बंदरगाह से सामान भेजने और लाने में रुचि नहीं दिखा रहे। यही कारण है कि पिछले 14 माह से बंदरगाह से व्यापारियों के माल का आवागमन नहीं हो रहा है। जबकि दावा किया है कि 2020 तक करीब साढ़े तीन मिलियन टन माल आयात-निर्यात किया जा सकता है। 

पुणे निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता अवली वर्मा ने जब इस बाबत सवाल पूछा तो भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने बताया कि वाराणसी से खाद्य तेल, खाद्य पदार्थ, टीएमटी बार के साथ ही स्टील के अन्य सामानों का कार्गो के जरिए भेजा और लाया गया है। आरटीआइ कार्यकर्ता अवली वर्मा ने विभाग से यह भी पूछा था कि इस बंदरगाह से कितने लोग आए और गए। हालांकि विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया कि यहां से सिर्फ मालवाहक जहाज ही गुजरे हैं। 

मालूम हो कि रामनगर के राल्हूपुर में नवंबर-2018 में बंदरगाह का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद पेप्सिको कंपनी का माल लेकर रवींद्रनाथ टैगोर जहाज कोलकाता से आया, फिर फरवरी-2019 में डाबर कंपनी का माल लेकर जहाज यहां पहुंचा। लेकिन, तकनीकी दिक्कतों के चलते बंदरगाह पर कार्गो से सामान लाने और ले जाने को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। इस समस्या को लेकर आईडब्ल्यूएआइ के अधिकारियों की ओर से कई बार स्थानीय संग बाहरी व्यापारियों से वार्ता की, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ। बता दें कि उसके विस्तारीकरण को लेकर और जमीन अधिग्रहण करने की तैयारी की जा रही है जिसमें वाराणसी, चंदौली और मीरजापुर जिला शामिल है। 

रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष देव भट्टाचार्या के अनुसार रामनगर में बंदरगाह का लोकार्पण होने पर काफी खुशी थी। व्यापारियों ने उम्मीद जताई थी कि सड़क मार्ग की बजाय जहाज से माल जल्दी आएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कोलकाता बंदरगाह से कार्गो से माल आने में कम से कम 15 दिन लगते हैं जबकि ट्रक से कम समय लगता है। साथ ही कंपनी से माल उठाकर कोलकाता बंदरगाह पर लोड कराना। वहां से रामनगर बंदरगाह आने पर फिर माल उठाकर गोदाम तक पहुंचाने में भाड़ा अलग से लगेगा।

Posted By: Abhishek Sharma

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