विधि व न्याय मंत्रालय ने जरूरतमंदों को फ्री विधिक सहायता के लिए न्याय बंधु एप लांच किया
केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा गरीब जरूरतमंदों को मुफ्त में विधिक सहायता के लिए न्याय बंधु एप लांच किया गया है।
वाराणसी, जेएनएन। केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा गरीब, जरूरतमंदों को मुफ्त में विधिक सहायता के लिए न्याय बंधु एप लांच किया गया है। इस एप को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुधा सिंह ने प्रयास किए हैं। उन्होंने एप की खूबियां गिनाते हुए आवेदक की पात्रता के बारे में भी बताया है। साथ ही एप को डाउनलोड कर फ्री कानूनी सहायता का लाभ लेने की अपील की है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुधा सिंह ने बताया कि न्याय बंधु एप किसी भी एंड्राइड मोबाइल फोन में गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। न्याय बंधु एप के माध्यम से गरीब, जरूरतमंद लोग रजिस्टर्ड प्रो बोनो एडवोकेट्स से संपर्क कर फ्री कानूनी सहायता ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि न्याय बंधु एप पूरे देश में हिंदी व अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 के दायरे में आने वाला कोई भी व्यक्ति आवेदक हो सकता है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं, वादकारियों एवं समाज के कमजोर समुदाय को इस एप से मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी। एप के लिए पात्रता के संबंध में उन्होंने बताया कि न्याय बंधु एप के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति का सदस्य स्त्री या बालक, दिव्यांग जो अभिरक्षा में हो, औद्योगिक कर्मकार, बहु विनाश जाति संहिता, जातीय अत्याचार, बाढ़, सूखा, भूकंप, औद्योगिक संकट के शिकार व्यक्ति, कानून के तहत निर्धारित राशि से कम सालाना आमदनी व्यक्ति इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
वाराणसी में कल से खुलेगी कचहरी, सीमित होंगे कार्य
हाईकोर्ट के आदेश पर कई दिनों से बंद दीवानी कचहरी 22 मई से खुलेगी। हालांकि लॉकडाउन के मद्देनजर सीमित अदालतों में ही न्यायिक कार्य होंगे। जिला जज उमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से सीमित न्यायिक कार्य किए जाएंगे। जिला जज की अदालत के अलावा अपर जिला जज (प्रथम), विशेष न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एसीजेएम (प्रथम) तथा किशोर न्यायालय में विचाराधीन व नए जमानत प्रार्थना पत्रों के अलावा आपराधिक मामलों से जुड़ी सिर्फ नई पत्रावलियों पर सुनवाई की जाएगी। अन्य अदालतों में सुनवाई स्थगित रहेगी। सिविल (दीवानी) मामलों की सुनवाई नहीं की जाएगी।
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