काशी नरेश ने दिलाई बनारस में नाट्य कला को पहचान
काशी में नाटकों का मंचन करीब 800 से 1000 वर्षों से चला आ रहा है। इस प्रकार बनारस में नाट्य व रंगमंच की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। इसका उद्भव काशी नरेश ईश्वरी प्रसाद नारायण सिंह की सोच से माना जाता है जो कालांतर में रामनगर की रामलीला के रूप में विश्व प्रसिद्ध हुई।

डा. संगीता घोष
काशी में नाटकों का मंचन करीब 800 से 1000 वर्षों से चला आ रहा है। इस प्रकार बनारस में नाट्य व रंगमंच की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। इसका उद्भव काशी नरेश ईश्वरी प्रसाद नारायण सिंह की सोच से माना जाता है जो कालांतर में रामनगर की रामलीला के रूप में विश्व प्रसिद्ध हुई।
काशी की नाट्य परंपरा को प्रचलित करने में भरत मिलाप या राजगद्दी प्रसंग का विशेष महत्व रहा है जो नाटी इमली मोहल्ले में आज भी मंचित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि 1850 से पहले काशी में कोई रंगशाला नहीं था। इसके बावजूद काशी में रामलीला का मंचन का होता था। उस समय सड़कों के किनारे मैदानों में लीलाएं आयोजित किया जाता था। इस प्रकार मंचन के लिए काशी में कोई स्थायी मंच नहीं था। पूर्व में महाराष्ट्र की नाट्य मंडलियों ने भी यहां पौराणिक और ऐतिहासिक नाटकों का मंचन किया। वर्ष 1933-34 में बुलानाला स्थित छविगृह जो कभी काशी टाकीज बाद में रूपरेखा, गणेश, राधा चित्र मंदिर के नाम से जाना जाता रहा। वर्ष 1939-40 में कोल्हुआ में ट्रेनिग कालेज के मुख्य हाल में एक कोने में स्थाई बाक्सनुमा रंगमंच का निर्माण हुआ। आचार्य करूणापति त्रिपाठी व आचार्य सीताराम चतुर्वेदी ने इसे अभिनव रंगशाला नाम से दिया। आचार्य सीताराम चतुर्वेदी के निर्देशन में महाकवि कालिदास का मंचन चित्रा टाकीज में किया गया। इस क्रम में वर्ष 1903 में बाबू मथुरादास जैन अग्रवाल और उनके मित्रों के प्रयास से जैन नाटक मंडली के रूप में हुआ। वर्ष 1909 में नागरी नाटक मंडली का निर्माण हुआ। काशी के रंगमंचीय परंपरा को विकसित करने में नागरी नाटक मंडली की अहम भूमिका रही। नाटक की परंपरा को काशी में फलित करने के लिए काशी के विभिन्न सांस्कृतिक कलाकारों व बंगीय समाज का विशेष योगदान रहा। नाट्य मंचन व नाट्य कलाकार, नाट्य लेखक के सफल मार्गदर्शकों के प्रसिद्ध नामों में सरयू बरफ वाले, राम सिंह आजाद आभा हश्र, कश्मीरी, आचार्य सीताराम चतुर्वेदी, शिव प्रसाद मिश्रा, सर्वदानंद, डा. भानु प्रसाद मेहता, राजकुमार प्रभात कुमार घोष, पीजी भट्टाचार्य केशव प्रसाद श्रीवास्तव, नीलकमल चटर्जी, अवध बिहारी लाल, सेना बाबू शिव शंकर लाल श्रीवास्तव, कमलिनी मेहता सहित अन्य लोग शामिल है।
(लेखक--प्रभारी, मंच कला विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ)
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