वाराणसी [कृष्‍ण बहादुर रावत]। भारत की जाति व्यवस्था की पृष्ठभूमि पर बनी आकर्षक प्रेम कहानी ‘सैराट’ ने काफी सुर्खियां बटोरी थी और सिनेमा की दुनिया में हलचल भी मचाई थी। इसने ना केवल बॉक्स ऑफिस के लिए नए रिकॉर्ड बनाए बल्कि समीक्षकों की तारीफें भी हासिल की थीं। दर्शकों तक एक उपयुक्त सामाजिक संदेश को बड़ी ही खूबसूरती से इसके जरिए पहुंचाया है। इतनी कड़वी सच्चाई को सहजता लेकिन प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती इस मास्टरपीस को हिन्दी में फिर से तैयार किया गया।

कॉमर्शियल रूप से सफल मानी गयी बॉलीवुड की 'धड़क' ने बड़े परदे पर फिर वही जादू चलाया। एंड टीवी नये रोमांटिक ड्रामा 'जात ना पूछो प्रेम की' के रूप में पहली बार इस फॉर्मेट में 'सैराट' और 'धड़क' का रूपांतरण प्रस्तुत कर रहा है। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर की ग्रामीण पृष्ठभूमि को प्रस्तुत कर रहा शो एक युवा जोड़ी की दिल छू लेने वाली प्रेम कहानी लेकर आया है। यह कहानी अपने इस खूबसूरत रिश्ते में जहर घोलते, जातिवाद के खिलाफ उन दोनों के संघर्ष की कहानी कहता है। सदियों पुरानी कड़वी सच्चाई को सामने लेकर आया यह शो प्यार की खातिर उनके संघर्षों और त्याग पर भी फोकस करता है। दलित लड़के बादल का लीड किरदार को टेलीविजन एक्टर किंशुक वैद्य निभाएंगे वहीं अभिनेत्री प्रणाली सुरेश राठौर अमीर ब्राह्मण लड़की सुमन की भूमिका में नज़र आयेंगी। वह किंशुक के अपोजिट होंगी।

अपने निगेटिव अवतार की तरफ रुख करते हुए एक्टर साई बल्लाल, सुमन के पिता की भूमिका में होंगे जोकि अलग-अलग जातियों में प्यार पर पाबंदी लगाते हैं। उत्तरप्रदेश के दलित लड़के की भूमिका के बारे में बताते हुए, किंशुक वैद्य कहते हैं, 'जब मैंने सुना कि सैराट जैसे नगीने को टेलीविजन के लिये तैयार किया जा रहा है तो मैं इस शो में शामिल होना चाहता था। मैं इतनी बेहतरीन कहानी का हिस्सा बनने के लिये बेहद उत्सुक था, खासतौर से 'जात ना पूछो प्रेम की' के बादल का किरदार निभाने के लिये। मैंने पहले जितनी भूमिकाएं निभायी हैं उससे यह काफी अलग है और इसकी तैयारियों के दौरान कुछ चीजें जानी-पहचानी और कुछ अनजानी थीं। बादल के किरदार में ढलने का मतलब था अपने बोल्ड अंदाज को छोड़ना जोकि मेरे अंदर स्वाभाविक रूप से मौजूद है और साथ मुझे सौम्यता तथा शर्मीलापन शामिल करना था।

मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मुझे इस बात को गहराई से समझने की जरूरत है कि किस तरह किसी खास जाति से संबंध रखने वालों के साथ अलग-अलग शहरों में व्यवहार किया जाता है। मैंने जातिवाद और किस तरह यह प्रचलित व्यवस्था अलग-अलग समाजों को प्रभावित करती है उसके बारे में कई सारे लेख पढ़ना शुरू किया। इससे जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, मैं इस भूमिका को लेने का इच्छुक था, क्योंकि यह पहले कही गयी एक प्रासंगिक कहानी को बताने का एक प्रयास कर रहा है, लेकिन कई सारी परतों के साथ। मुझे पूरी उम्मीद है कि दर्शकों को यह पसंद आयेगा और वह इसे सराहेंगे।

वहीं डेब्यू कर रहीं प्रणाली सिंह राठौर ने कहा- 'जात ना पूछो प्रेम की' से अपने टेलीविजन के सफर को शुरू करने से बेहतर कुछ और नहीं हो सकता था। इस शो में उन्हीं भावनाओं, प्रभाव और गहराई को फिर से पेश किया जायेगा जो कि पहले 'सैराट' और उसके बाद 'धड़क' में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा चुका है। सुमन का मेरा किरदार केवल एक अमीर लड़की का नहीं जोकि प्यार करती है, बल्कि सच्चाई के लिये सारी मुश्किलों के खिलाफ लड़ने वाली और सबसे महत्वपूर्ण अपने प्यार की खातिर लड़ने वाली लड़की का है। यह सिर्फ एक दिलचस्प किरदार नहीं, बल्कि मेरे लिये प्रेरणादायी किरदार भी है। ऐसा कहते हुए मुझे और भी डर लग रहा है और मुझे उम्मीद है कि इस भूमिका के साथ मैं अपना प्रभाव छोड़ पाऊंगी। 'सैराट' और 'धड़क' की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 'जात ना पूछो प्रेम की' 18 जून से शुरू हो रहा है। इसका प्रसारण सोमवार से शुक्रवार रात आठ बजे से एंड टीवी पर किया जायेगा।

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