वाराणसी, जेएनएन। कोरोनावायरस के  संक्रमण को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन में मिल रही शराब घर की प्रहरी यानी महिलाओं के मन को नहीं भा रही। पूरे लॉकडाउन में घर में व्यंजनों की भरमार थी लेकिन एक बार भी महिलाओं ने शिकायत नहीं की रुपये कम थे। जैसे-तैसे गुजारा हो रहा था लेकिन शराब की दुकानें खुलने के साथ महिलाएं नाराजगी जता रही हैं। घरों में हो रही मारपीट व घरेलू हिंसा के आकड़ों में अचानक इजाफा हो गया है। अब सवाल ये है कि सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने से पहले महिलाओं के बारे में सोचा होगा।

क्या सरकार को नहीं पता था कि लॉकडाउन के कारण डोमेस्टिक-वायलेंस के केस इस कदर तेजी से बढ़ेगें। जिले की सूचनाओं पर नजर डाले तो रोजाना करीब 500 डायल 112 पीरआरवी पर सूचनाएं प्राप्त होती है। दो मई को कुल सूचनाएं प्राप्त 440 जिनमें घरेलू हिंसा संबधित 29 हैं। तीन मई को कुल प्राप्त सूचनाएं 385 जिनमें सिर्फ 17 सूचनाएं घरेलू से संबधित हैं। वहीं, चार मई को लॉकडाउन तीन के पहले दिन शराब की दुकाने खुलने के बाद कुल सूचनाएं प्राप्त 499 हैं जिनमें महिलाएं हिंसा की सूचनाएं 51 है। पांच मई को कुल 339 में से 38 सूचनाएं महिला हिंसा की है। ये आकड़े तो वे है जो पुलिस तक पहुंचे हैं जबकि हकीकत तो इससे कई गुना है। वे चाहकर भी पुलिस को फोन नहीं कर पाती। शराब की दुकानों के खुल जाने से शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि मानसिक और आॢथक संकट से जूझना से पड़ रहा है। शराब मिलने के बाद इनको पत्नियों को प्रताडि़त करने की वजह भी मिल गई। घर में रुपयों की कमी होने पर जरुरी सामानों को बेचकर या पत्नी ने जो रुपये बचा के रखे होगें छीनकर शराब पीएंगे।

शराब की दुकानों पर लगी कतारें

लॉकडाउन तीन में शराब की दुकानों को सुबह दस से शाम सात बजे तक खुलने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन शर्त ये थी कि दुकानों पर शारीरिक दूरी का पालन कराना होगा, नहीं दुकान को सीज कर दिया जाएगा। दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी, प्रशासन की कार्रवाई  हवा-हवाई रह गई। वहीं, पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। दुकान के बाहर लंबी कतारें और सबको अपनी बारी का इंतजार है लेकिन इन सबके के आगे प्रशासन लाचार दिखा।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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