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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद ने किया शिव तांडव का पाठ, अनवरत संघर्ष करने का लिया संकल्‍प

By Abhishek SharmaEdited By:
Published: Mon, 30 May 2022 06:15 PM (IST)

Gyanvapi Mukti Mahaparishad ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद ने सोमवार को वाराणसी में ज्ञानवापी की ओर मुख करके शिव तांडव स्‍त्रोत का ...और पढ़ें

ज्ञानवापी मामले में सोमवार को शिव तांडव स्‍त्रोत का पाठ किया गया।
ज्ञानवापी मामले में सोमवार को शिव तांडव स्‍त्रोत का पाठ किया गया।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। ज्ञानवापी क्षेत्र को अपवित्र ढांचे से मुक्त कराने के लिए ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में नंदी भगवान का पूजन-अर्चन करने के बाद ज्ञानवापी की ओर मुख कर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया। सबने ज्ञानवापी की मुक्ति होने तक अनवरत संघर्ष का संकल्प लिया।

जैसा कि धार्मिक विश्वास है कि नंदीजी के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह पूर्ण होती है। इसके वशीभूत श्रद्धालु कार्यकर्ताओं ने नंदीजी के कान में कहा कि आपकी 350 वर्षों की तपस्या पूर्ण होने को है, हम आपका पूजन व अर्चन करते हैं। आप हमें आशीर्वाद प्रदान करें कि हम शीघ्र ही आदि विश्वेश्वर का अभिषेक कर पाने का सुअवसर प्राप्त करें। इसके उपरांत बाबा के भक्तों ने ज्ञानवापी की ओर मुख करके आदि विश्वेश्वर का स्मरण करते हुए रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया और ज्ञानवापी तथा आदि विश्ववेश्वर की मुक्ति का संकल्प लिया।

महापरिषद के संस्थापक अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल ने बताया कि ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद का गठन 1987 में विश्व हिंदू परिषद के तालमेल से काशी में विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को मुक्त कराने के लिए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति की तर्ज पर हुआ था। उस समय महामंत्री जवाहर तथा उपाध्यक्ष डा सोहन लाल आर्य (अब महामंत्री) को बनाया गया था।

तब से लेकर अब तक ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद हर वर्ष माता श्रृंगार गौरी का चैत्र नवरात्र में तथा बाबा विश्वनाथ की मुक्ति के लिए श्रावण मास तथा महाशिवरात्रि में लगातार संघर्ष करती आ रही है। अनेक बार गिरफ्तारी तथा कई बार मुस्लिम समुदाय व पुलिस प्रशासन का विरोध झेला है। शिव तांडव पाठ के बाद महापरिषद के कार्यकर्ताओं ने श्री काशी विश्वनाथ बाबा का दर्शन -पूजन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से शिवकुमार शुक्ला, राजा आनंद ज्योति सिंह, अभिनव शंकर न्यूटन, पतंजलि, श्रीनिवास, दीपक, वेदांत, विवेक, आशीष आदि उपस्थित थे।