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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 11, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग को लेकर आज होगी सुनवाई

By Jagran NewsEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 11 Oct 2023 07:41 AM (IST)

Gyanvapi Case ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं (Hindu) के प्रवेश पर रोक लगाने मां शृंगार गौरी भगवान गणेश हनुमान समेत दृश्य ...और पढ़ें

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग को लेकर आज होगी सुनवाई
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग को लेकर आज होगी सुनवाई

HighLights

  1. ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर आज होगी सुनवाई
  2. इसमें प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से आपत्ति दाखिल करना है।

जागरण संवाद सूत्र, वाराणसी। ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने, मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, हनुमान समेत दृश्य व अदृश्य देवी-देवताओं के नियमित दर्शन-पूजन, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए वहां मंदिर बनाने की मांग को लेकर पर्यावरणविद् प्रभु नारायण की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर बुधवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई होगी। इसमें प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से आपत्ति दाखिल करना है।

पर्यावरणविद् प्रभु नारायण की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र ज्ञानवापी परिसर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, हनुमान समेत दृश्य व अदृश्य देवी के नियमित दर्शन-पूजन, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए वहां बने मस्जिद को हटाकर मंदिर बनाने की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में होगी। इसमें प्रतिवादी पक्ष की ओर से आपत्ति दाखिल करना है।

परिसरमें सर्वे रहेगा जारी

वुजूखाने की सर्वे की मांग पर सुनवाई पांच अक्टूबर को ज्ञानवापी परिसर स्थित शिवलिंग छोड़कर पूरे वुजूखाने की एसएसआइ सर्वे की मांग के प्रार्थना पत्र पर मस्जिद पक्ष ने आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए पांच अक्टूबर की तिथि तय की है।

श्रृंगार गौरी मुकदमे की वादिनी राखी सिंह की ओर से उनके वकील सौरभ तिवारी, अनुपम द्विवेदी, मान बहादुर ने यह प्रार्थना पत्र 29 अगस्त को दाखिल किया गया था। इस मामले में सभी पक्षकारों को प्रार्थना पत्र की प्रति अदालत के आदेश पर कार्यवाही के दौरान उपलब्ध कराई गई।

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