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गोटुकोला: याददाश्त सुरक्षित रखना है तो करें गोटुकोला का सेवन, शोध में सामने आई मस्तिष्क की सुरक्षा की राह

Published: Sat, 31 Oct 2026 08:14 PM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मंडूकपर्णी (गोटुकोला) पर एक अध्ययन किया है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गोटुकोला उम्र से जुड़ी संज्ञानात्मक कमजोरी में प्रभावी।

  2. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम कर मस्तिष्क को सुरक्षित रखता है।

  3. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती याददाश्त को लेकर आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही गोटुकोला (मंडूकपर्णी) अब आधुनिक शोध की कसौटी पर भी उम्मीद जगाती दिख रही है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सेंटेला एशियाटिका (गोटुकोला का वानस्पतिक नाम) के अर्क का अध्ययन कर पाया है कि यह उम्र से जुड़ी संज्ञानात्मक कमजोरी (भुलक्कड़पन, याददाश्त कमजाेर होना, ध्यान न लगना, दिमाग कमजोर होना आदि) के दौरान मस्तिष्क को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकती है। अध्ययन में यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को नियंत्रित करने और मस्तिष्क के कोलिनर्जिक तंत्र को बेहतर बनाए रखने में प्रभावी पाई गई है।

बीएचयू के मेडिसिनल केमिस्ट्री विभाग से जुड़े प्रो. त्रयंबक देव सिंह के सहयोग से हुए इस शोध में मध्यम आयु के चूहों पर गोटुकोला के इथेनालिक अर्क का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग मात्रा में अर्क देकर करीब 42 दिन तक उसके प्रभावों का आकलन किया।

इसके बाद स्मृति और कार्यकारी क्षमता से जुड़े व्यवहारिक परीक्षण किए गए। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली संज्ञानात्मक गिरावट में यह औषधीय पौधा किस तरह भूमिका निभाता है।

दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले तनाव पर असर

शोध का एक अहम पहलू ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस है। उम्र बढ़ने के दौरान मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव क्षति बढ़ सकती है, जिससे न्यूरान्स की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। अध्ययन में गोटुकोला के सेवन के बाद ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े जैव-रासायनिक संकेतकों में सुधार देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि पौधे के सक्रिय घटक मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी कोलिनर्जिक प्रणाली है। मस्तिष्क में एसिटाइलकोलीन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर सीखने और स्मृति से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोध में एसिटाइल कोलिनेस्टरेज (नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र में पाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण एंजाइम) गतिविधि को भी देखा गया। गोटुकोला के प्रभाव से इस तंत्र में संभावित सुधार दिखा, जिससे स्मृति संबंधी कार्यों में लाभ की संभावना बनती है।

न्यूरान्स की संरचना को भी संरक्षण

बीएचयू से जुड़े शोध में गोटुकोला के प्रभाव का केवल व्यावहारिक परीक्षणों तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि मस्तिष्क के ऊतक स्तर पर भी देखा गया। पूर्व के अध्ययन में एल्युमिनियम क्लोराइड से उत्पन्न संज्ञानात्मक क्षति के माडल में इसके प्रभावों का परीक्षण किया गया था। इस बार ऑक्सीडेटिव तनाव, कोलिनर्जिक तंत्र और मस्तिष्क के कार्टेक्स व हिप्पोकैंपस में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया।

इन प्रभावों को देखते हुए विज्ञानी शोधकर्ताओं ने तंत्रिका रक्षक आयुर्वेदिक शोधों में आगे बेहतर डिजाइन वाले क्लीनिकल ट्रायल की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रो. त्रयंबक सिंह ने बताया कि गोटुकोला पर यह शोध ‘जर्नल आफ एथ्नेफार्मेकोलाजी’ में प्रकाशित है जो परंपरागत औषधीय ज्ञान को आधुनिक न्यूरोसाइंस से जोड़ता है।

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