बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रहा आयुर्वेद, डिमेंशिया के मरीजों की याददाश्त में भी सुधार; AIIA की रिपोर्ट
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के एक कार्यक्रम में बुजुर्गों के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता में आयुर्वेद उपचार से सुधार का ...और पढ़ें

आयुर्वेद से बुजुर्गों की सेहत में सुधार के संकेत। फोटो-जागरण
HighLights
आयुर्वेद उपचार से बुजुर्गों की सेहत में सुधार के संकेत।
जीवन गुणवत्ता, पाचन क्षमता, हड्डियों की मजबूती में वृद्धि दर्ज।
डिमेंशिया रोगियों की याददाश्त, सोचने की क्षमता में सुधार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार उपचार से बुजुर्गों की शारीरिक सेहत और जीवन गुणवत्ता में सुधार के उत्साहजनक संकेत मिले हैं। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानकी ओर से हरियाणा के फरीदाबाद जिले में चलाए गए कार्यक्रम में बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता, पाचन क्षमता और हड्डियों की मजबूती में सुधार दर्ज किया गया।
वहीं, डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के मरीजों की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता के आकलन में भी सकारात्मक बदलाव सामने आए।
60 दिनों तक उपचार के बाद सुधरा रिजल्ट
संस्थान की जन-स्वास्थ्य पहल के तहत 60 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 5594 बुजुर्गों की तीन महीने में जांच की गई और उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं।
कार्यक्रम के पहले चरण में 60 दिनों तक उपचार के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन गुणवत्ता आकलन का स्कोर 292 से बढ़कर 326.3 हो गया। पाचन क्षमता से जुड़े अग्निबल के सभी छह मानकों और हड्डियों के खनिज घनत्व में भी सुधार दर्ज किया गया।
डिमेंशिया के 200 मरीजों का आकलन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में चार महीने के दौरान डिमेंशिया से पीड़ित 200 मरीजों की जांच कर उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं। उनकी मानसिक क्षमता का आकलन दो मान्य परीक्षणों से किया गया।
इनके परिणामों में सुधार के संकेत मिले। इस समूह में जीवन गुणवत्ता का स्कोर 277.4 से बढ़कर 364.2 हो गया। सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन, डीएचईए और विटामिन डी के स्तरों में भी सुधार दर्ज किया गया।
बुजुर्गों में मिलीं कई स्वास्थ्य समस्याएं
शुरुआती जांच में 67.73 प्रतिशत बुजुर्गों में दृष्टि संबंधी समस्या, 43.05 प्रतिशत में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85 प्रतिशत में सोचने-समझने की क्षमता में कमी पाई गई। कई बुजुर्ग उच्च रक्तचाप, बढ़े हुए रक्त शर्करा स्तर, हड्डियों की कमजोरी, कब्ज और नींद संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित थे।
24 अक्टूबर को एआइआइए में आयोजित कार्यशाला में परियोजना के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए और रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई।
आयुष मंत्रालय के सलाहकार डा. कौस्तुभ उपाध्याय ने बुजुर्गों के साथ सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने और उन्हें शारीरिक व मानसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने ऐसे कार्यक्रमों को अधिक से अधिक बुजुर्गों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
