Famous Temples In Varanasi : काशी विश्वनाथ धाम : भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है काशी, अब नए अंदाज में देखें मंदिर
Famous Temples In varanasi गंगा किनारे बसे काशी को भगवान शिव की नगरी और भोलेनाथ को काशी का महाराजा कहा जाता है। यहां का काशी विश्वनाथ मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 352 साल बाद महालय का पुरातन से भी नव्य-भव्य स्वरूप निखर कर दुनिया के सामने आया है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। गंगा किनारे बसे काशी को भगवान शिव की नगरी और भोलेनाथ को काशी का महाराजा कहा जाता है। यहां का काशी विश्वनाथ मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शनों के लिए हर रोज लाखों भक्त आते हैं, लेकिन सोमवार का दिन विशेष होता है। यहां की गंगा आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
दैविक काल से बनारस देव भूमि के नाम से जाना जाता है। यह शहर पवित्र गंगा नदी के किनारे बसा है। गंगा के किनारे कुल 84 घाट हैं। बनारस अपनी धार्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर साल दुनियाभर से पर्यटक बनारस घूमने आते हैं। लोग गंगा आरती में शामिल होकर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर बाबा के दरेशन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि दैविक काल में महादेव काशी में ही रहते थे।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर की आंखों के स्वप्न को एक कर्मयोगी के वचन का आश्रय मिल गया है। काशी विश्वनाथ धाम के बहाने काशी में इतिहास की एक ऐसी स्वर्ण मंजूषा निर्मित हुई है जो सहस्नब्दियों तक अपनी ऊर्जा से धर्म-संस्कृति के इस धाम को रोशन करती रहेगी। इस मंदिर ने विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता और विध्वंस का दंश सहा है। आज उस अन्याय का प्रतिकार हुआ है। चार सौ साल पहले जो मंदिर औरंगजेब की क्रूरता से छिन्न-भिन्न हो गया था, ढाई सौ साल पहले इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस मंदिर के पुनरुद्धार के महान संकल्प की नींव रखी उसे लेकर किसने सोचा था कि प्रधानमंत्री मोदी उसी नींव पर करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का स्वर्ण महल खड़ा कर दिए।
भोलेनाथ के अष्ट मातृकाओं की स्थापना
काशी में ही वेद व्यास ने चारों वेदों का सर्वप्रथम उपदेश दिया था। यहां 56 विनायक हैं। यहीं मोक्ष प्रदान करने वाली सातों नगरी हैं। द्वादश आदित्य हैं। पांचों तीर्थ हैं। इनका विवरण यहां सुलभ होगा। इसके अलावा मणिकर्णिका तीर्थ की स्थापना, ढुंढिराज गणोश की प्रथम शिव स्तुति, अष्ट भैरव की स्थापना, भगवान शंकर का 64 योगिनियों को काशी में भेजना, बाबा विश्वनाथ के त्रिशूल पर टिकी काशी, भोलेनाथ के अष्ट मातृकाओं की स्थापना, महाकवि कालिदास की शिव स्तुति आदि का वर्णन भी धाम की पट्टिकाओं पर होगा। काशी विश्वनाथ धाम के पीछे प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का एक बीज है, जो अब आस्था के वटवृक्ष में परिवर्तित हो चुका है। शिव भक्तों की आने वाली पीढ़ियों को सदियों तक इस वटवृक्ष की छाया मिलती रहेगी।
नव्य-भव्य स्वरूप निखर कर दुनिया के सामने आया
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में राग-विराग दोनों ही अपनी अलौकिक आभा के साथ सुभाषित व प्रकाशित हो उठा है। शायद अब 352 साल बाद महालय का पुरातन से भी नव्य-भव्य स्वरूप निखर कर दुनिया के सामने आया है। शिवपुरी में आस्था का रेला हिलोर ले रहा है। लंबी प्रतीक्षा के बाद यह जो शुभ बेला 13 दिसंबर 2021 को आई है। 5,27,730 वर्ग फीट में विस्तारित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को समर्पित किया।
आइए जानते हैं बाबा विश्वनाथ मंदिर के बारे में कुछ प्रमुख बातें
1. बाबा विश्वनाथ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध यह शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। कहा जाता है कि गंगा किनारे स्थापित इस मंदिर की स्थापना 1490 में हुई थी।
2. ऐसी पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव गंगा के किनारे इस नगरी में निवास करते हैं। उनके त्रिशूल की नोक पर काशी बसी है। भगवान शिव काशी के पालक और संरक्षक है, जो यहां के लोगों की रक्षा करते हैं।
3. काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर एक सोने का छत्र लगा हुआ है। ऐसा मान्यता है कि इस छत्र के दर्शन से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
4. बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के बारे में एक और बात कही जाती है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तो सूर्य की पहली किरण काशी पर ही पड़ी थी।
5. काशी नगरी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में उपस्थिति मात्र से ही भक्त को जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
6. सावन के माह में बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। उस दौरान अभिषेक से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। हालांकि, सोमवार के दिन भी यहां भारी संख्या में भक्त काशी के राजा महादेव के दर्शनों के लिए विशेष तौर पर आते हैं।
7. इस मंदिर को आक्रमणकारियों ने कई बार निशाना बनाया। मुगल सम्राट अकबर ने प्राचीन मंदिर को दोबारा बनवाने का आदेश दिया था, जिसे बाद में औरंगजेब ने तोड़वा डाला। वहां पर उसने मस्जिद का निर्माण कराया, जो ज्ञानवापी मस्जिद के नाम से जाना जाता है।
8. बताया जाता है कि लोगों को जब पता चला कि औरंगजेब इस मंदिर को तोड़ना चाहता है तो भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को एक कुएं में छिपा दिया गया। वह कुआं आज भी मंदिर और मस्जिद के बीच में स्थित है।
9. उसके बाद इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ के इस प्राचीन मंदिर का पुनर्रुद्धार कराया। मृत्यु, समय और काल से परे भगवान शिव फिर से यहां पूजे जाने लगे। एक बार फिर देवों के देव महादेव के दर्शनों के लिए भक्त उमड़ने लगे।
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