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    एफडी तुड़वाने बैंक पहुंचा रिटायर्ड डॉक्टर, वजह पूछने पर हुआ नाराज, शक हुआ तो बुलाई गई पुलिस… सभी के उड़ गए होश

    Updated: Thu, 22 May 2025 08:07 AM (IST)

    वाराणसी में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. पीआर गुप्ता को बेटी के आपराधिक मामले में शामिल होने की बात कहकर डराया। उनसे रुपये ऐंठने की कोशिश की। ठगों ने उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। बैंक कर्मियों को शक होने पर उन्होंने पुलिस को सूचित किया जिससे डॉक्टर साहब ठगी का शिकार होने से बच गए।

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    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। साइबर ठगों ने बीएचयू से सेवानिवृत्त ह्रदय रोग विशेषज्ञ प्रो. पीआर गुप्ता को साइबर ठगों ने 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा। बेटी और उनको गिरफ्तार करने का डर दिखाकर उनसे अपनी बातें मनवाते रहे। बैंककर्मियों व पुलिस की सतर्कता से उनके रुपये ठगों के पास जाने से बच गए।

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    यह है पूरा मामला

    लंका थाना क्षेत्र के रश्मिनगर कालोनी निवासी चिकित्सक ने थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्र को बताया कि बीते मंगलवार की सुबह दस बजे उनके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया।

    कहा कि उनकी चिकित्सक बेटी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त है। उसके खिलाफ मुकदमा लिखा जा रहा है। उसके साथ ही कई और युवक-युवतियां भी शामिल हैं। उसने बेटी को बचाने के लिए रुपये की मांग की। 

    धमकी दिया कि रुपये न देने पर बेटी के साथ उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा और जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इस बाद कई बार फोन चिकित्सक के पास आए। फोन करने वाले पुलिस अधिकारी बनकर चिकित्सक से अमेरिका में उनकी चिकित्सक बेटी और उनके बीएचयू व लंका स्थित तीन बैंक खातों की जानकारी लेने लगे। 

    उन्होंने चिकित्सक को एक कमरे में बंद रहने और फोन काल के बारे में किसी को न बताने के लिए कहा। डॉ. पीआर गुप्ता साइबर ठगों की बातों से बुरी तरह से भयभीत रहे। उनके कहने पर रुपयों को साइबर ठगों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए लंका स्थित एचडीएफसी बैंक पहुंचे।

    बैंक कर्मियों को हुआ शक

    बराए हुए चिकित्सक ने बैंककर्मी से अपना फिक्स डिपोजिट तोड़कर रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। बैंककर्मी ने बड़ी रकम का फिक्स डिपाजिट तोड़ने का कारण पूछा तो वह नाराज हो गए। 

    इसकी जानकारी बैंक मैनेजर को हुई तो उन्होंने भी चिकित्सक से बात की, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इस पर बैंक कर्मियों को संदेह हुआ और इसकी सूचना लंका थाना प्रभारी को दी।

    पुलिस से भी बचते रहे चिकित्सक

    लंका थाना प्रभारी ने बैंक में डॉ. पीआर गुप्ता से बात की तब भी वह कुछ बताने को तैयार न हुए। बार-बार अपने रुपयों की मांग करते रहे। उन्हें थाने लाकर समझाया गया तो उनका डर खत्म हुआ। उन्होंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। 

    बताया कि पुलिस अधिकारी बनकर बात करने वाले फोन से लगातार उनकी गतिविधियों की जानकारी ले रहे हैं। इस पर लंका थाना प्रभारी ने साइबर ठगों के नंबर पर बात की जिसके बाद से वह नंबर बंद हो गए। जिन नंबरों से चिकित्सक को फोन आ रहा थे वह आंध्र प्रदेश के हैं।