जागरण संवाददाता, भदोही। श्रम विभाग और कोतवाली पुलिस की टीम ने मंगलवार को मर्यादपट्टी स्थित कालीन कारखाने में छापेमारी कर तीन बाल मजदूरों को मुक्त कराया। छापेमारी की भनक लगते ही कारखाना संचालक ने अन्य 47 बाल श्रमिकों को इधर-उधर कर दिया। पुलिस की टीम ने बच्चों को बाल न्यायालय ज्ञानपुर में पीसी उपाध्याय की अध्यक्षता में गठित न्यायिक टीम के समक्ष प्रस्तुत किया। जहां से बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया है।

कोतवाली पुलिस ने तीन बच्चों को लेकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। बाल श्रमिकों ने कोर्ट को बताया कि वह किसी तरह से भागकर कारखाना से बाहर निकल गए हैं जबकि अभी भी 50 बाल श्रमिक फंसे हुए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक टीम ने श्रम विभाग को कंपनी में छापेमारी कर और बच्चों को मुक्त कराने को कहा। सहायक श्रमायुक्त कमलेश कुमार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रतिमा माैर्य, इंद्रजीत तिवारी, दीपक मौर्य एवं चाइल्ड लाइन के संयोजक विनय पाठक के अलावा कोतवाली पुलिस कारखाना में धमक पड़ी। अधिकारियोें के आने की भनक लगते ही कालीन कारखाना संचालक ने बाल श्रमिकों को हटा दिया। कारखाना में केवल तीन मजदूर काम करते मिले। संचालक भी मौके पर नहीं मिला। श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि कारखाना में और बच्चे नहीं मिले हैं। तीनों बाल श्रमिक के स्वजनों को सूचना दे दी गई है। कालीन संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नोटिफिकेशन का किया स्वागत : अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को बीडा अधिकारी संदीप कुमार से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया। कारपेट सिटी के आवंटियों को जमीन बेचने व नाम स्थानांतरण संबंधी जारी नोटिफिकेशन का स्वागत करते हुए भवन मानचित्र बनाने के लिए शुरू की गई नई प्रक्रिया पर चर्चा की गई। एकमाध्यक्ष ओंकारनाथ मिश्रा ने बताया कि 13 अगस्त को लखनऊ में एमएसएमई के अपर प्रमुख सचिव डा. नवनीत सहगल की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान उठाए गए मुद्दों की प्रगति के संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी से वार्ता की गई। प्रतिनिधिमंडल में असलम महबूब, जेपी गुप्ता, तनवीर हुसैन, आरके बोथरा आदि थे।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty