वाराणसी, जेएनएन। गंगा पार रेती में नहर बनाई जा रही है। यह कार्य तेज गति से किया जा रहा है क्योंकि मानसून आने से पहले ही कार्य को समाप्त कर देगा। प्रोजेक्ट के अनुसार 31 मई तक कार्य पूर्ण कर सिंचाई विभाग को हैंडओवर कर देना था लेकिन कोरोना संक्रमण काल के कारण कार्य की पूर्णता 15 दिन विलंबित हो गई है।

बाढ़ के दिनों में गंगा के पक्के घाटों के नीचे कटान की स्थित बन जाती है। पूर्व में हुई जांचों के अनुसार घाट के पत्थरों के नीचे पोल सा हो गया है। यही वजह है कि कई घाट पर पत्थ्रर दब गए थे। हालांकि, स्मार्ट सिटी योजना के तहत उनको दुरुस्त कर लिया गया है लेकिन इस समस्या का स्थाई समाधान हो सके, इसके लिए सिंचाई विभाग समेत अन्य विशेषज्ञों की राय से गंगा पार रेती में नहर बनाने की योजना बनी। इसके तहत सामनेघाट के पार रेती में नहर बनाया जा रहा है जिसे राजघाट पुल के पास गंगा में मिलाया जाएगा। एक प्रकार से यह गंगा का कृत्रिम सोता बनाया जा रहा है। यह करीब पांच किमी लंबा होगा। नहर के दोनों छोर को गंगा से मिलाना अभी शेष है। कार्यदायी कंपनी के सहायक परियोजना अधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि जो काम 31 मई तक पूरा हो जाता। अब वह 15 जून तक पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान में 80 फीसद से ज्यादा कार्य पूरा हो चुका है। बता दें कि कार्य में देरी की वजह रेता पर सब्जी की खेती करने वाले कुछ किसान भी थे जिनके विरोध के चलते करीब पांच दिन तक कार्य नहीं हो सका था।