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    वट से बांधे सांसों की डोर : आजमगढ़ में कई सामाजिक संगठनों की महिलाएं ग्रुप के माध्यम से कर रहीं प्रेरित

    By Saurabh ChakravartyEdited By:
    Updated: Mon, 07 Jun 2021 04:56 PM (IST)

    ‘दैनिक जागरण’ ने वट सावित्री व्रत के दिन 10 जून को सुहागिनों से वट के एक पौधे को रोपित करने का आह्वान किया है। अभियान की तीसरी कड़ी में शहर में कई सामाजिक संगठनों से जुड़ीं महिलाएं इसके लिए अपील भी कर रहीं हैं।

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    प्रकृति के रूप में यदि देखें तो यह वट का एक पेड़ 100 पेड़ों के बराबर होता है।

    आजमगढ़, जेएनएन। हमारी परंपराओं की जड़ें इतनी गहरी हैं, जो संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करती हैं। इसलिए तीज-त्योहारों पर हमारे यहां पेड़-पौधों की पूजा होती है। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि पेड़-पौधों में देवी-देवताओं का वास होता है जिससे हम उसकी सुरक्षा कर सकें। वट सावित्री का व्रत भी उनमें से ही एक है। वट में स्वयं नारायण का वास माना जाता है। प्रकृति के रूप में यदि देखें तो यह वट का एक पेड़ 100 पेड़ों के बराबर होता है। घना छायादार होने के चलते इससे तमाम लाभ होते हैं। इसलिए इस बार ‘दैनिक जागरण’ ने वट सावित्री व्रत के दिन 10 जून को सुहागिनों से वट के एक पौधे को रोपित करने का आह्वान किया है। अभियान की तीसरी कड़ी में शहर में कई सामाजिक संगठनों से जुड़ीं महिलाएं इसके लिए अपील भी कर रहीं हैं। उनका कहना है कि वह अपने संगठन के माध्यम से अधिक से अधिक वट (बरगद) का पौधा रोपित करने की अपील करेंगी।मैं

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    संकल्प लेेती हूं

    हर महिलाओं के अंदर बरगद के पौधाें को रोपित करने की मन में लालसा जागृत हो जाए

    हम दिन भर मैसेज शेयर करते रहते हैं। लेकिन अबकी बार हमें वट सावित्री के दिन एक पौधा रोपित करने के लिए मैसेज शेयर करना है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से ‘दैनिक जागरण’ की मुहिम का इतना प्रचार-प्रचार करना है कि हर महिलाओं के अंदर बरगद के पौधाें को रोपित करने की मन में लालसा जागृत हो जाए। व्रत के दिन पौधा रोपित करना वैसे भी हमारे यहां बहुत अच्छा माना गया है।

    -पूनम पांडेय, महामंत्री, अभया महिला सेवा संस्थान।

    यदि आक्सीजन चाहिए तो वट का पौधा लगाएं

    दैनिक जागरण में पहले दिन खबर प्रकाशित होने के बाद ही सोच लिया था इस बार 10 जून को वट का पौधा रोपित करूंगी। क्योंकि यह न सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है बल्कि वर्तमान और भविष्य में लोगों की जिंदगी से भी जुड़ा है। यदि आक्सीजन चाहिए तो वट का पौधा लगाएं, यह सिर्फ महिलालाओं नहीं, सभी काे सोचना होगा।

    -रानी मिश्रा, गृहिणी, परमानपुर, तरवां।

    जिले में 100 पौधे भी रोप दिए गए तो बड़ी उपलब्धि होगी

    दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर को पढ़कर संगठन से जुड़ीं महिलाओं को बता दिया था। उसके बाद से लगातार उनके संपर्क में हूं। महिलाओं से अभी से वट के पौधे का इंतजाम करने के लिए कह दी हूंञ जिससे वह 10 जून को पौधे को रोपित कर सकें। व्रत के दिन जो भी सुगाहिनें पौधे को रोपित करेंगी वह उसे सुरक्षित रखने का भी संकल्प जरूर लेंगी। जिले में 100 पौधे भी रोप दिए गए तो बड़ी उपलब्धि होगी।

    -मधुमिता बनर्जी, उपसचिव, महिला मंडल जनसेवा समिति।

    वट का एक पौधा लगाएं और उसकी पूजा करें

    हमारे तीज-त्येाहारों में पेड़-पौधों के पूजन का विशेष महत्व है। इसलिए हमें इसके महत्व को समझना चाहिए। ‘दैनिक जागरण’ की मुहिम को हमें अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना चाहिए। हमारे मोबाइल में तमाम ग्रुप हैं। इस संदेश को ग्रुप में भेजकर महिलाओं को प्रेरित करूंगी। जिससे 10 जून को वट की शाखाओं को तोड़कर उनकी पूजा न करें, बल्कि वट का एक पौधा लगाएं और उसकी पूजा करें।

    -माला सिंह, जिलाध्यक्ष, नारी शक्ति सेवा संस्थान।