वाराणसी, जागरण संवाददाता। गंगा घाटों के सरंक्षण के लिए उस पार बनाई जा रही नहर के दोनों तरफ के बालू हटाना बड़ी समस्या बनती जा रही है। बरसात जारी है, बाढ़ की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अब तक चार बार हुई नीलामी के बाद पांच ठेकेदार बालू उठान को सामने आए हैं। इसमें रिंग रोड फेज दो से जुड़े कांट्रैक्टर भी शामिल हैं। लगभग 2.5 लाख घन मीटर बालू की नीलामी हो चुकी है। कुल छह लाख घन मीटर बालू होने का अनुमान है। इस तरह अभी 3.5 लाख घन मीटर बालू के उठान की नीलामी होनी शेष है। चार बार की नीलामी में मुश्किल से पांच ठेकेदार बालू उठान को तैयार हुए। सरकारी कोई विभाग आगे नहीं आया।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि बालू उठान के लिए निविदा जारी होने के बाद भी ठेकेदार आगे नहीं आए। जब इसके बारे में फीडबैक लिया गया गया तो रास्ता न होना बड़ी समस्या बताई गई। फिलहाल यूपीपीसीएल को रास्ता तत्काल तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि रास्ता ठीक होते ही बालू उठान को लेकर कांट्रैक्टर आगे आएंगे। इसके अलावा खनन विभाग को इस बाबत निर्देशित किया गया है कि वह वाराणसी के अलावा अन्य शहरों के भी कांट्रैक्टर से बात करें। कोई बालू उठान कर इसका एकत्रित करना चाहता है तो इस बाबत भी अस्थाई बालू संग्रह की अनुमति दी जाएगी। उम्मीद है कि इस पखवारे में बालू हटा लिया जाएगा, हालांकि अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है लेकिन समय कम है।

बाढ़ के दिनों में गंगा के पक्के घाटों के नीचे कटान की स्थित बन जाती है। पूर्व में हुई जांचों के अनुसार घाट के पत्थरों के नीचे पोल सा हो गया है। यही वजह है कि कई घाट पर पत्थ्रर दब गए थे। हालांकि, स्मार्ट सिटी योजना के तहत उनको दुरुस्त कर लिया गया है लेकिन इस समस्या का स्थाई समाधान हो सके, इसके लिए सिंचाई विभाग समेत अन्य विशेषज्ञों की राय से गंगा पार रेती में नहर बनाने की योजना बनी। इसके तहत सामनेघाट के पार रेती में नहर बनाया जा रहा है जिसे राजघाट पुल के पास गंगा में मिलाया जाएगा। एक प्रकार से यह गंगा का कृत्रिम सोता बनाया जा रहा है। यह करीब पांच किमी लंबा होगा। नहर के दोनों छोर को गंगा से मिलाना अभी शेष है। कार्यदायी कंपनी के सहायक परियोजना अधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि जो काम 31 मई तक पूरा हो जाता। अब वह 15 जून तक पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान में 80 फीसद से ज्यादा कार्य पूरा हो चुका है। बता दें कि कार्य में देरी की वजह रेता पर सब्जी की खेती करने वाले कुछ किसान भी थे जिनके विरोध के चलते करीब पांच दिन तक कार्य नहीं हो सका था।