विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Unnao में गजब कारनामा! शिक्षक पिता को कागजों में मृत दिखा बेटे ने ली अनुकंपा नौकरी, मां को पेंशन; 13 साल बाद ऐसे खुला राज

Published: Sun, 20 Sep 2026 06:46 PM (IST)

शिक्षक रामबरन यादव पर आरोप है कि उन्होंने 2002 में अपने पिता को मृत घोषित कर अनुकंपा के आधार पर ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. शिक्षक पिता को 2002 में मृत घोषित कर मृतक आश्रित कोटे से 2003 में शिक्षक बना

  2. वर्ष 2014-15 में मृतक पिता श्रीराम के नाम पर जमीन का बैनामा कराने पर उठे सवाल

  3. कोराना गांव के ललितेश सिंह ने शासन से प्रशासन तक की शिकायत, फर्जीवाड़े से नौकरी पाने का दावा

जागरण संवाददाता, उन्नाव। शिक्षक पिता को मृत घोषित कर उनके स्थान पर मृतक आश्रित कोटे से स्वयं शिक्षक बने बेटे पर गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत शासन से प्रशासन तक के उच्चाधिकारियों को करते हुए शिकायतकर्ता ने आरोपित पर फर्जीवाड़ा कर शिक्षक बन जाने का आरोप लगाया है।

वहीं मामला प्रकाश में तब आया जब जिस पिता को वर्ष 2002 में मृतक घोषित कर बेटे द्वारा शिक्षक की नौकरी पाई गई। उसके 13 साल बाद पिता के नाम पर जमीन का बैनामा कराया गया। बीएसए शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई है। जिसमें सहायक लेखाधिकारी सतीश पांडेय, बीईओ दीपेश व अनीता शाह को जांच के निर्देश दिए गए हैं। टीम को सात दिन में रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट के आधार पर आरोपित शिक्षक पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।

असोहा ब्लाक क्षेत्र के मंझरिया गांव के निवासी श्रीराम यादव वर्ष 2002 में नीमटीकर गांव के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। उनके छोटे बेटे रामबरन यादव वर्ष 2003 में ने पिता को मृतक घोषित करते हुए उनकी जगह पर मृतक आश्रित कोटे से शिक्षक बन गए और उनकी मां को पेंशन मिलने लगी। इसके बाद रामबरन परिवार सहित लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के गोविंदपुर के मजरे कोराना गांव में रहने लगे और वहीं से असोहा में नौकरी भी करने लगे।

रामबरन ने वर्ष 2004 में असोहा ब्लाक से हिलौली में तबादला करवा लिया और हिलौली ब्लाक के मोहन खेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में वर्षों तक अध्यापक रहे। वर्तमान में वह हिलौली के खेरवा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। रामबरन के इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब वर्ष 2014-15 में मृतक पिता श्रीराम के नाम पर जमीन का बैनामा कराया गया।

इसकी शिकायत कोराना गांव के ललितेश सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने शिक्षा निदेशक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, उप मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को शिकायत पत्र देकर की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अगर श्रीराम यादव वर्ष 2002 में सरकारी अभिलेखों में मृतक हैं, तो उनके नाम पर जमीन का बैनामा कैसे हुआ। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक बेटा रामबरन 2002 से गांव नहीं आया। जबकि, उसके बड़े भाई देवेंद्र (गुड्डू यादव) कभी-कभी गांव आते रहते हैं।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर श्रीराम 2002 में मृतक हुए, तो उनकी 13 साल बाद 2014-15 में बैनामा व जमीन की विरासत 21 वर्ष बाद 2023 में क्यों हुई। खंड शिक्षा अधिकारी हिलौली सुरेश कुमार ने बताया कि हाल ही में आरटीआई के माध्यम से श्रीराम और रामबरन की सेवा पुस्तिका मांगी गई थी। जिसे उपलब्ध करवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई लिखित शिकायत आती है, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षक ने न उठाया फोन न दिया जवाब

प्रकरण में आरोपित शिक्षक रामबरन का पक्ष जानने के लिए संवाददाता द्वारा तीन बार उनके मोबाइल नंबर पर फोन लगाया गया। लेकिन आरोपित शिक्षक ने फोन नहीं उठाया। प्रकरण में आरोपित शिक्षक को व्हाट्सअप पर संदेश भेजकर भी जवाब मांगा गया, लेकिन इसका भी जवाब नहीं दिया।

यह भी पढ़ें- निशानेबाजी में दुनिया में 'महिमा' गान: शुक्लागंज की बेटी ने 4 साल में रचा इतिहास, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में साधेंगी लक्ष्य

यह भी पढ़ें- उन्नाव में पूर्व विधायक के भाई को 4 दिन में रखा अवैध तरीके से हिरासत में, दारोगा निलंबित, थानाध्यक्ष पर भी कार्रवाई की मांग