उन्नाव में संपत्ति विवाद बना जानलेवा, शरीर में कई वार के बाद मरा नहीं दिलशाद तो सीने में घोप दी थी तलवार
उन्नाव के बांगरमऊ में संपत्ति विवाद को लेकर दिलशाद उर्फ पप्पू की उसके पिता और भाइयों ने बेरहमी से हत्या ...और पढ़ें

गंजमुरादाबाद के खत्रियाना मुहल्ला में घटना के दूसरे दिन तैनात पुलिस । जागरण
HighLights
संपत्ति विवाद में दिलशाद की बेरहमी से हत्या।
कई वार के बाद सीने में तलवार घोंपी गई।
पिता और भाई हत्या के आरोप में गिरफ्तार।
संवाद सहयोगी, जागरण, बांगरमऊ (उन्नाव)। गंजमुरादाबाद के खत्रियाना मुहल्ले में मकान के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में दिलशाद उर्फ पप्पू की हत्या जिस बेरहमी से की गई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसकी तस्वीर और भयावह कर दी। हमलावर तीन भाई, पिता व बहनोई द्वारा किए गए हमले में जब दिलशाद की सांसें नहीं टूटीं तो उसके सीने में तलवार घोंप दी गई।
तलवार का वार इतना गहरा था कि दाहिनी ओर का फेफड़ा फट गया और इसी तरफ की पसली भी टूट गई। चेहरे, सीने और दोनों हाथों समेत शरीर पर कुल सात गहरे जख्म पोस्टमार्टम के दौरान डाक्टर को मिले। अधिक खून बहने व सदमा लगने के बाद दिमाग की नस फटने से दिलशाद की मौत होने की पुष्टि हुई है।
वारदात के बाद गिरफ्तार किए गए दिवंगत के पिता मुर्तजा और बड़े भाई इरशाद को गुरुवार को पुलिस ने जेल भेज दिया, वहीं देर शाम मुख्य आरोपित तलवार से हमला करने वाले दिवंगत के छोटे भाई एजाज और भाई शहजाद को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। बहनोई दिलशाद की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि दिलशाद का पिता मुर्तजा और भाइयों से मकान में हिस्से को लेकर करीब ढाई वर्ष से विवाद चल रहा था। शादी के बाद उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया गया था, लेकिन वह लगातार अपना हिस्सा मांगता रहा। पांच माह पहले रिश्तेदारों और मुहल्ले के लोगों की मौजूदगी में समझौता हुआ था।
मकान में हिस्सा छोड़ने के बदले दिलशाद को छह लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। रकम मिलने के बाद दिलशाद अलग मकान बनाने की तैयारी में था। उसने बिल्हौर बाईपास के पास प्लाट भी खरीद लिया था, लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी उसे रुपये नहीं मिले। इसी को लेकर परिवार में फिर विवाद बढ़ गया। बुधवार को इसी के चलते दिलशादी के उसके पिता व भाईयों ने मिलकर बेरहमी से हत्या कर दी।
मैं न मारता तो दिलशाद मुझे मार देता
पुलिस हिरासत में मुख्य आरोपित एजाज ने पुलिस को बताया कि जब से पिता ने दिलशाद को संपत्ति से बेदखल किया था, वह रंजिश मानने लगा था। उसे लगने लगा था कि हम भाईयों ने ही पिता को भड़काकर उसके खिलाफ कर दिया। वह बदले की भावना से बुधवार को घर पहुंचा था। यदि हमला न करता वह मुझे मार देता। हालांकि यह पता नहीं था कि हमले में दिलशाद की मौत हो जाएगी। वह अपनी बात बता फफक पड़ा।
गमगीन माहौल में गांव में ही दफनाया गया शव
पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार दोपहर दिलशाद का शव घर पहुंचा तो मुहल्ले के लोगों में गम और गुस्सा साफ दिखा। लोगों ने कहा कि जिस मकान के एक हिस्से के लिए अपनों ने अपने ही भाई को मौत की नींद सुला दिया।
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बंद हुई सैलून की दुकान, खड़़ी हुई रोजी-रोटी की चिंता
आरोपित शहजाद सैलून की दुकान चलाकर पत्नी रुखसार व दो मासूम बेटे अरबाज शहबाज का पेट पालता था। भाई के खून से हाथ रंगने व जेल में जाने के बाद उसकी सैलून की दुकान बंद हो गई। रोज कमाने व रोज खाने का सिलसिला रुकते ही अब पत्नी को बच्चों की परवरिश की चिंता सताने लगी है। वहीं पूर्व में बीमारी से जान गंवाने वाले बड़े भाई बबलू की पत्नी आयशा भी दो बच्चों अलीना और अलीशा की परवरिश की चिंता में परेशान है। पति की मौत के बाद वह देवर व ससुर पर निर्भर थी।
