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    दर्द का इंजेक्शन, दस्ताना और स्प्रिट बाहर से रहे मंगवा

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 28 Mar 2022 07:00 PM (IST)

    जागरण संवाददाता उन्नाव जिला महिला और पुरुष अस्पताल में दवाओं का अभाव है। महिला अस्पताल में

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    दर्द का इंजेक्शन, दस्ताना और स्प्रिट बाहर से रहे मंगवा

    जागरण संवाददाता, उन्नाव : जिला महिला और पुरुष अस्पताल में दवाओं का अभाव है। महिला अस्पताल में दर्द का इंजेक्शन, दस्ताना, स्प्रिट आदि तक मरीजों को बाहर से लाना पड़ रहा है। पुरुष अस्पताल आने वाले दिव्यांग और गंभीर मरीजों को व्हीलचेयर तक नहीं मिलती है, जबकि ओपीडी से वार्ड तक वार्ड ब्वाय की तैनाती है। महिला अस्पताल की सफाई व्यवस्था तो भगवान भरोसे है। शिकायतों का भी अस्पताल प्रशासन पर कोई असर नहीं है।

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    थाना अजगैन के गांव बसीरतगंज की वंदना को प्रसव पीड़ा होने के बाद महिला अस्पताल लाया गया। डाक्टर ने सीजर बताया। स्वजन इसके लिए तैयार हो गए तो उन्हें दस्ताना, स्प्रिट, दर्द का इंजेक्शन बाहर से लाने को कहा गया। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें लिखकर नहीं दिया दवा की पर्ची पकड़ा दी। वहीं शहर के मोहल्ला एबीनगर निवासी दिव्यांग खलीक के पैर में घाव था वह डाक्टर को दिखाने गया। बैसाखी के सहारे लगभग दो घंटे तक एक से दूसरे कक्ष में भकटता रहा बाद में सर्जन ने दवा इंजेक्शन लिखा । वह पर्चा लेकर घिसटते हुए इंजेक्शन कक्ष पहुंचा जहां कर्मचारी नहीं थे इससे वह काफी देर तक गैलरी में इंतजार करता रहा। यह दो मामले तो बानगी मात्र हैं। पुरुष अस्पताल में गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट करने के समय भी स्वजन को स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। जबकि यहां इमरजेंसी से वार्ड तक वार्ड ब्वाय की पर्याप्त तैनाती है। सीएमएस का कहना है कि वार्ड ब्वाय के सभी पद भरे हैं फिर भी मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। महिला अस्पताल में सीजर के दौरान बाहर से दर्द के इंजेक्शन, दस्ताना, स्प्रिट आदि लगभग एक माह से मंगाए जा रहे हैं। सीएमएस डा. अंजू दुबे का कहना है कि सीएमएसडी से नहीं मिल रहे हैं तो मजबूरी है मरीज की जान बचाने के लिए जो सामान नहीं होता है वह बाहर से मंगाया जाता है।

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    मरीजों की लगी रही लंबी लाइन

    - रविवार अवकाश के बाद सेामवार को ओपीडी खुली तो मरीजों की लंबी लाइन लग गई। दवा वितरण काउंटर , डायग्नोस्टिक सेंटर और पर्चा काउंटर पर लाइन में लगे मरीजों व तीमारदारों के बीच धक्का मुक्की तक हुई। डाक्टरों को दिखाने के लिए भी मरीजों को जोर अजमाइश करनी पड़ी। सबसे अधिक बीमार बच्चे पहुंचे इनमें 40 से अधिक बुखार और डायरिया से पीड़ित रहे। वहीं नेवरना अचलगंज निवासी राजेश को बुखार आने के बाद हालत बिगड़ गई। डाक्टर अजीत ने उसे डिमेंशिया में भर्ती किया कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।

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    महिला अस्पताल में गंदगी का साम्राज्य

    - सफाई कर्मचारी न होने से महिला जिला अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेपटरी है। एसएनसीयू समेत कई यूनिटों के बाथरूम में तो पैर रखना दूभर है। महिला प्रसव केंद्र में इमरजेंसी ड्यूटी पर रहने वाली डाक्टर के लिए बने रेस्ट रूम के पीछे दिव्यांग प्रसाधन केंद्र है। वहां इतनी गंदगी है कि रेस्ट के दौरान महिला डाक्टरों का सांस लेना दूभर रहता है। महिला अस्पताल सीएमएस डा. अंजू दुबे ने बताया कि दिसंबर से सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं है। इससे यह समस्या है। नई सेवा प्रदाता कंपनी का इंतजार है।