जागरण संवाददाता, उन्नाव : जिला अस्पताल में आइसोलेशन यूनिट में कार्यरत एक नर्सिग असिस्टेंट फर्जी कोविड रिपोर्ट बनाकर डेढ़ से दो हजार रुपये में देता था। ज्यादातर रिपोर्ट निगेटिव होने की रहती थीं। उसका वीडियो वायरल होने के बाद सीएमएस ने संज्ञान लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सीएमएस ने उसकी सेवा समाप्त करके संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी को पत्र भेजा है।

मंगलवार को जिला अस्पताल में नर्सिग असिस्टेंट के पद पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी एबी चौधरी का इंटरनेट मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ। इसमें वह 1500 रुपये लेकर निगेटिव कोविड रिपोर्ट देने की बात कह रहा था। हालांकि, दैनिक जागरण ऐसे किसी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। सीएमएस डॉ. बीबी भट्ट ने वायरल वीडियो को गंभीरता से लेकर कोतवाली में संबंधित स्वास्थ्य कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। रिपोर्ट दर्ज होने से अनजान स्वास्थ्य कर्मी जैसे ही ड्यूटी पर पहुंचा तो कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश मिश्र ने अस्पताल चौकी प्रभारी के साथ जाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। फर्जी कोविड रिपोर्ट बनाने में स्वास्थ्य कर्मी के गिरफ्तार होने से डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में खलबली मच गई। सीएमएस डॉ. भट्ट ने बताया कि आरोपित स्वास्थ्य कर्मी एबी चौधरी एक सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से नर्सिंग असिस्टेंट के पद पर लगभग तीन वर्ष से जिला अस्पताल में तैनात है। उसकी ड्यूटी लैब सहायक के रूप में कोविड आइसोलेशन में भी लगती थी। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो नवंबर के अंतिम सप्ताह का है। इसमें वह 1500 रुपये लेकर निगेटिव रिपोर्ट देने की बात कह रहा है। उन्होंने बताया कि उसकी सेवा समाप्त करके संबंधित सेवा प्रदाता एजेंसी को पत्र भेजकर सूचना दे दी है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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काफी समय से चल रहा था फर्जीवाड़ा

जिला अस्पताल में रुपये लेकर फर्जी कोविड रिपोर्ट देने का खेल काफी समय से चल रहा था। इसके पूर्व भी आरोपित स्वास्थ्य कर्मी की शिकायतें हुईं, लेकिन कोई प्रमाण नहीं मिलने से बचता रहा। बाहर जाने वाले या नौकरी पेशा को बनाता था शिकार

आरोपित ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि नौकरी पेशा या बाहर जाने वाले लोग उससे जल्दी रिपोर्ट दिलाने को कहते थे। वह उनसे निगेटिव रिपोर्ट देने का वादा करके वसूली कर लेता था।

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ऐसे देता था फर्जी रिपोर्ट

आरोपित स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि जिसकी जांच होनी होती थी, वो उसका सैंपल नहीं लेता था। आधार कार्ड, नाम पता व फोन नंबर लेता था। जिसकी पहले निगेटिव रिपोर्ट आती थी, उसी का सैंपल ट्रूनाट लैब में जमा कर देता था। ट्रूनाट से दो घंटे में जांच रिपोर्ट आने के कारण उसी से कोविड जांच कराता था।

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सेवा प्रदाता कंपनी के सभी कर्मियों को लैब से हटाया

फर्जी कोविड रिपोर्ट बनाने के खेल का राजफाश होने के बाद जिला अस्पताल ही नहीं सीएमओ भी सतर्क हो गए हैं। कोविड जांच और सैंपलिग के काम में लगे सेवा प्रदाता कंपनी के सभी कर्मचारियों को ड्यूटी से मुक्त करने का आदेश जारी किया गया है। डॉक्टर की निगरानी में सैंपलिग, शासन को रिपोर्ट

सीएमएस डॉ. बीबी भट्ट ने बताया कि फर्जीवाड़ा का राजफाश होने से अब आइसोलेशन यूनिट के डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी मौजूदगी में आधार कार्ड से फोटो का मिलान करके ही सैंपलिंग कराएं। कार्यकारी सीएमओ डॉ. तन्मय कक्कड़ ने बताया कि डीएम को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट एफआइआर समेत उपलब्ध कराई गई है। डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि गंभीर प्रकरण है। शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।

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