गतिरोध

उन्नाव, नगर संवाददाता : शहर के पेयजल व्यवस्था में पालिका प्रशासन की अनदेखी का घुन लगा है। शहर में की दो दर्जन बस्तियों में रहने वाले लोगों को पाइप लाइन न होते हुए भी वाटर टैक्स अदा करना पड़ रहा है। यह हाल उन पुरानी बस्तियों का है जो दो दशक पूर्व आबाद हुई थीं।

नगर पालिका परिषद उन्नाव के 29 वार्डो क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक मोहल्ले ऐसे हैं जिनमें पाइप लाइन नहीं डाली गई है। उसके बाद भी लोगों को वाटर टैक्स देना पड़ता है।

इन मोहल्लों में नहीं है पाइप लाइन

जिन प्रमुख वार्ड क्षेत्रों के मोहल्लों में पाइप लाइन नहीं हैं उनमें सिविल लाइंस के मोहल्ला केवटा तालाब, मौहारीबाग, आचार्य नगर, बंदूहार, प्रयाग नारायण खेड़ा नई बस्ती, पूरब खेड़ा, पश्चिम खेड़ा, दरोगाबाग, एबीनगर दक्षिणी में डीएसएन कालेज के पीछे, अकरमपुर, सिंगरोसी, शेखपुर, हिरन नगर, आदर्श नगर नई बस्ती, हनुमान नगर, पूरन नगर आदि प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों के निवासियों को सरकारी पाइप लाइन से बीस वर्ष से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी पानी नहीं मिला। कारण है पालिका प्रशासन ने पाइप लाइन डलवाकर नलकूपों से जोड़ना गंवारा नहीं किया। इस बीच सभासदों ने दर्जनों प्रस्ताव दि हर बार धन आते है कि पाइप लाइन डलवाने का आश्वासन देकर बोर्ड में पास प्रस्तावों को बस्ता खामोशी में डाला जाता रहा। इसी का नतीजा है शहर के पुराने मोहल्लों में रहकर भी लोगों को आज तक सरकारी नल से पानी नहीं मिला।

पाइप लाइन न होने पर भी क्यों देना पड़ता है वाटर टैक्स

उन्नाव: कई दशक पुराने मोहल्लों में पाइप लाइन न होने के बाद भी वाटर टैक्स क्यों लिया जाता है। इस सवाल पर अभियंता एसके जौहरी ने कहा कि जहां पाइप लाइन है उसकी दो सौ मीटर परिधि में बने मकान से वाटर टैक्स वसूलने का नियम है इसी के तहत लागों से वाटर टैक्स लेना पड़ता है।

पाइप लाइनों के विस्तार में कहां है गतिरोध

पाइप लाइनों के विस्तार में नलकूपों के अभाव का गतिरोध है। पालिका के जलकल विभागीय सूत्रों की मानी जाए तो शहर के नलकूपों में तीन को छोड़ अन्य अपनी क्षमता का आधा पानी भी नहीं देते हैं। यह अलग बात है कि कागजों में यह नलकूप अपनी क्षमता का लगभग 75 फीसदी पानी दे रहे हैं। नये नलकूपों की स्थापना के लिए धन का अभाव बना है। इससे पालिका नलकूप नहीं बनवा पा रही है। नलकूप न होने से नई पाइप लाइनें डालने से किनारा किए है।

डीप बोर भी नहीं हुए चालू

उन्नाव : शहर वासियों की पेयजल समस्या का समाधान करने के लिए भारत सरकार ने लगभग पांच वर्ष पूर्व तीन डीप बोर नलकूप स्वीकृत किए थे। इन नलकूपों में एक आवास विकास, दूसरा दरोगाबाग और तीसरा पहली खेड़ा में स्थापित कराया गया। पहली खेड़ा तो चल गया पर आवास विकास और दरोगाबाग की बोरिंग होने के बाद भी चालू नहीें हो सके हैं।

क्यों नहीं चले नलकूप

उन्नाव: डीपबोर नलकूपों की स्थापना काम जल निगम को सौपा गया था। जल निगम अधिकारियों का कहना है कि टुकड़ों में धन मिल रहा है जितना धन मिलता है उसी के अनुसार काम कराया जा रहा है। इससे नलकूपों का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

पानी में पी गए पौने चार करोड़

उन्नाव : शहर की पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए नए नलकूप, नई पाइप लाइन डालने के लिए जल निगम को पौने चार करोड़ रुपया शासन से मिला था। जलनिगम यह काम करवा रहा है। लेकिन पैसा कहां खर्च हो रहा है यह कोई नहीं जानता। पालिका सभासदों में कलीमउल्ला, सुनील अवस्थी आदि ने कहा कि पौने चार करोड़ पानी में बह गए पर पानी नसीब नहीं हुआ। पालिका के जलकल अभियंता एसके जौहरी ने बताया कि शहरी पेयजल व्यवस्था को सुदृढ करने के लिए वर्ष 2008-2009 में जल निगम को पौने चार करोड़ रुपये दिए गए थे। जल निगम ने शहर को 12 जोन में विभक्त कर पाइप लाइन विस्तार और नये नलकूप बनाने का काम शुरु किया जोन 6 मोतीनगर का काम पूरा कर नगर पालिका को वर्ष 2011 में हैंड ओवर कर दिया था। इसके बाद एक भी जोन का काम पूरा नहीं किया गया। इस संबंध में जल निगम प्रबंधक से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि विधान मंडल समिति का अध्ययन दल आ रहा है उसकी तैयारी चल रही है अभी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक जोन का काम पूरा करने की रिपोर्ट देने के बाद शासन दूसरे जोन के लिए धन अवमुक्त करता है इससे समय लगता रहा है। जलकल अभियंता का कहना है कि सबकुछ जल निगम पर निर्भर है।

शहर के पेयजल की व्यवस्था

शहर वासियों को पेयजल आपूर्ति के लिए 24 नलकूप, ओवरहेड टैंक 9 हैं। मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति 150 लीटर पानी की जरूरत होती है। लेकिन शहर के निवासियों को बमुश्लि 75 से 80 लीटर पानी ही लोगों को मिल पा रहा है।

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