कचरे के बदले मिलता है सैनिटरी पैड का पैक, सोनभद्र की महिलाओं ने बदल दी गांव की तस्वीर
सोनभद्र के ऊंचडीह गांव में ग्राम प्रधान अर्चना त्रिपाठी के नेतृत्व में महिलाओं ने मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी पहल शुरू की है। इसके तहत दो किलो प्लास्टिक कचरा जमा करने पर महिलाओं को सैनिटरी पैड दिए जाते हैं। इस पहल से मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है और पर्यावरण प्लास्टिक मुक्त हो रहा है। गांव को आदर्श ग्राम पंचायत का पुरस्कार भी मिला है। य
अरविंद तिवारी, सोनभद्र। बदलाव की इच्छाशक्ति हो, तो छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ऊंचडीह गांव की महिलाओं ने इस कथन को सच कर दिखाया है। ग्राम प्रधान अर्चना त्रिपाठी की नेतृत्व में गांव की महिलाएं न केवल पर्यावरणीय स्वच्छता को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं को भी तोड़ रही हैं। उनकी अभिनव पहल ‘मेरा प्लास्टिक, मेरी जिम्मेदारी’ ने स्वच्छता, महिला स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का सफल प्रयास किया है।
अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत महिलाएं दो किलो प्लास्टिक कचरा जमा कर पंचायत भवन या संसाधन पुनर्प्राप्ति केंद्र (आरआरसी) में जमा करती हैं। इसके बदले उन्हें एक पैकेट सैनिटरी पैड दिया जाता है। यह पहल मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।
अर्चना बताती हैं कि उन्हें इसकी प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान से मिली। उन्होंने स्थानीय कंपोजिट विद्यालयों की महिला शिक्षकों और छात्राओं को भी इस मुहिम में जोड़ा, जिससे बालिकाओं में भी स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
दो किलो प्लास्टिक देने पर मिलता है सैनेटरी पैड
गांव की करीब तीन हजार की आबादी में महिलाएं अब अपने घरों के बाहर एक बोरी टांगती हैं, जिसमें घर में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के थैले, पैकेजिंग सामग्री, पानी की बोतलें और अन्य प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाता है।
जब बोरी में दो किलो प्लास्टिक भर जाती है, तो उसे पंचायत भवन लाकर सैनिटरी पैड प्राप्त किया जाता है। अर्चना त्रिपाठी के अनुसार अब तक दो क्विंटल प्लास्टिक पंचायत में जमा किया जा चुका है और प्रति माह लगभग 80 किलो कचरा एकत्रित हो रहा है। यह पहल पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के साथ-साथ महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना रही है।
गांव को मिला आदर्श ग्राम पंचायत का पुरस्कार
इस नवाचार के चलते ऊंचडीह ग्राम पंचायत को दो बार आदर्श ग्राम पंचायत का पुरस्कार मिल चुका है। इन पुरस्कारों के साथ एक बार 20 लाख और दूसरी बार 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी ग्राम पंचायत को मिली। अर्चना को दिल्ली में ‘सरपंच संवाद’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री से संवाद का मौका भी मिला और 2025 की गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
वह कहती हैं-'अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन असली आनंद समाज के लिए कुछ बेहतर करने में है।' आने वाले समय में इस कार्यक्रम को और विस्तार देने और नई प्रेरणादायक योजनाएं शुरू करने की योजना है। ऊंचडीह की यह पहल निश्चित ही देश के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन सकती है।
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