बीएचयू की टीम ने जांच में किया दावा- सोन-नर्मदा के फाल्ट मिले सक्रिय, भूकंप को लेकर वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
सोनभद्र दौरे पर आए भू-वैज्ञानिकों की टीम ने रेणुकूट व सोन वैली क्षेत्र को भूकंप के लिए अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। सोन-नर्मदा साउथ फाल्ट व दूसरी तरफ सोन नर्मदा नार्थ फाल्ट है। इससे यह साफ होता है कि यह चट्टाने काफी जटिल है।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जनपद दौरे पर आए भू-वैज्ञानिकों की टीम ने रेणुकूट व सोन वैली क्षेत्र को भूकंप के लिए अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। जांच के दौरान सोन-नर्मदा फाल्ट सक्रिय मिला है, जिसको लेकर टीम ने चिंता व्यक्त की है। महुअरिया स्थित सोन वैली क्षेत्र को भू-वैज्ञानिकों की टीम ने मारकुंडी फाल्ट (भू-गर्भ दरार) के रूप में चिन्हित किया है।
जहां के दाईं तरफ बड़े-बड़े पहाड़ व बाएं तरफ समतल क्षेत्र हैं। यह बातें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के डा. सयनदीप बनर्जी ने दैनिक जागरण से विशेष वार्ता के दौरान कही। बताया कि 16 अक्टूबर को वैज्ञानिकों की टीम ने मीरजापुर स्थित लखनिया दरी, मारकुंडी घाट, सलखन फासिल्स व रेणुकूट के विभिन्न इलाकों का विश्लेषण किया। बताया कि मारकुंडी घाटी एक फाल्ट है।
जहां पर दो तरह की चट्टाने पूर्व में थीं। समय के साथ एक तरह की चट्टान का अपक्षय व क्षरण बहुत ज्यादा हुआ और दूसरे का कम, जिस वजह से आज हमें वहां पहाड़ और मैदान दिख रहा। बताया कि सलखन जीवाश्म पार्क एक भूवैज्ञानिक विरासत है। जो बताता है कि यह चट्टानें मेसो प्रोटेरोजोइक युग की हैं (140 करोड़ वर्ष पुराना) और सलखन क्षेत्र समुद्र में डूबा हुआ था।
भूकंप के लिए रेणुकूट का क्षेत्र संवेदनशील
भू-वैज्ञानिक सयनदीप बनर्जी ने बताया कि रेणुकूट का क्षेत्र भूंकपीय क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। कारण यह महाकौशल पहाड़ी श्रृंखला पर बसा हुआ है। बताया कि एक तरफ सोन-नर्मदा साउथ फाल्ट व दूसरी तरफ सोन नर्मदा नार्थ फाल्ट है। इससे यह साफ होता है कि यह चट्टाने काफी जटिल है।
जांच के दौरान टीम ने फाल्ट के सक्रिय होने का संकेत देखा, जो कभी भी बड़े भूकंप का कारण भी बन सकता है। चेतावनी देते हुए कहा कि यहां पर भविष्य में रिएक्टर पैमाने पर पांच से सात तक भूकंप के झटके दर्ज किए जा सकते हैं। यह फाल्ट पहले सक्रिय नहीं था जो अब धीरे-धीरे सक्रिय हो गया है।
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