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चुर्क सीमेंट फैक्ट्री का अनाेखा इतिहास: नेहरू ने नींव रखी थी… अब डालमिया-अदाणी मालिक; नौ लोग चढ़े थे निजीकरण की बलि

Published: Tue, 03 Nov 2026 05:52 PM (IST)

चुर्क सीमेंट फैक्ट्री, जिसकी आधारशिला नेहरू ने रखी थी, अब डालमिया और अदाणी समूह के स्वामित्व में आ गई है।

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HighLights

  1. नेहरू ने 1952 में रखी थी चुर्क फैक्ट्री की आधारशिला।

  2. सपा सरकार में निजीकरण, फिर सरकारी नियंत्रण में वापस आई।

  3. जेपी के दिवालिया होने पर डालमिया-अदाणी को मिला स्वामित्व।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। कभी सरकारी उपक्रम के रूप में सोनांचल की औद्योगिक पहचान बना चुर्क सीमेंट कारखाना लगभग पांच वर्ष की बंदी के बाद एक बार फिर संचालन की ओर बढ़ रहा है। अब इस परिसर में दो बड़े औद्योगिक घराने नई शुरुआत करने जा रहे हैं। परिसर के 60 प्रतिशत हिस्से में अदाणी पावर लिमिटेड की ओर से 180 मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट का निर्माण व मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है।

वहीं, 40 प्रतिशत हिस्से में डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड की ओर से सीमेंट उत्पादन इकाई स्थापित की जा रही है। दोनों परियोजनाओं में अगले एक-दो वर्षों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे सोनभद्र के औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलने के साथ हजारों लोगों के रोजगार का रास्ता खुल सकता है।

वर्ष 1956 में शुरू हुआ था उत्पादन

चुर्क सीमेंट फैक्ट्री की आधारशिला वर्ष 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। वर्ष 1956 में उत्पादन शुरू हुआ। शुरुआत में चुर्क सीमेंट कारखाने के नाम से संचालित यह इकाई वर्ष 1972 में उप्र स्टेट सीमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के अधीन आ गई।

सरकारी उदासीनता और घाटे के कारण इसके निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 1990 में इसकी नींव पड़ी और तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल में इसे निजी हाथों में सौंप दिया गया। उस समय डालमिया समूह ने इसे खरीदा था। हालांकि इस निर्णय का व्यापक विरोध हुआ।

डाला गोलीकांड के बाद सरकार ने फिर संभाली थी कमान

चुर्क फैक्ट्री के निजीकरण के विरोध में दो जून 1991 को डाला में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से नौ छात्र व कर्मचारी मारे गए थे। इस गोलीकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इसके बाद प्रदेश में 24 जून 1991 को कल्याण सिंह सरकार बनी। कल्याण सिंह की पहल पर कारखाना फिर सरकारी नियंत्रण में आया, जिससे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को राहत मिली।

हालांकि, वर्ष 2003 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2005 में इसे दोबारा निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया। जेपी सीमेंट ने अधिग्रहण के बाद यहां सीमेंट और पावर प्लांट का संचालन शुरू किया।

दिवालिया जेपी समूह से डालमिया-अदाणी के पास विरासत

तीन जून 2024 को जय प्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के दिवालिया होने के बाद चुर्क परिसर के स्वामित्व में फिर बदलाव हुआ। अब 30 मई 2026 से परिसर डालमिया और अदाणी समूह के पास है। डालमिया समूह ने जेपी की रीवा, चुनार और प्रयागराज स्थित सीमेंट इकाइयों का भी अधिग्रहण किया है।

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