कुलदीप मिश्र, मिश्रिख (सीतापुर) :

मिश्रिख कस्बा महर्षि दधीचि की नगरी है। यही वह क्षेत्र है जहां पर 84 कोसी परिक्रमा का समापन होता है और होली परिक्रमा मेला लगता है। मेले में देश-विदेश से लाखों की संख्या में साधु संत व श्रद्धालु मिश्रिख पहुंचते हैं। अन्य दिनों में भी हजारों श्रद्धालुओं का कस्बे में आना-जाना रहता है। यहां से होकर रेल पटरियां गुजरी हैं, रेलवे स्टेशन भी है। बावजूद इसके यहां की यातायात व्यवस्था सड़क मार्ग पर ही निर्भर है। वजह यह है इस स्टेशन पर पूरे दिन में चार बार ही ट्रेनों का आगमन होता। सुबह एक ट्रेन बालामऊ से, दूसरी कानपुर वाया बालामऊ ट्रेन दोपहर के वक्त स्टेशन पर पहुंचती है। वहीं सीतापुर से भी इसी तरह से दो ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती हैं। रेलवे स्टेशन का हाल यह है कि स्टेशन पर उतरने वाले यात्री मूलभूत सुविधाओं को तरसते हैं। स्टेशन पर हैंडपंप खराब पड़ा है। टंकी की पेयजल आपूर्ति भी बेहतर नहीं है। प्रकाश की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। जिससे रात के वक्त तो यहां पर अंधेरा ही छाया रहता है। शौचालय बने हैं, लेकिन दरवाजे नहीं हैं। साफ सफाई भी भगवान भरोसे है। रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों के पेयजल के लिए मेन गेट के उत्तर दिशा में तीन हैंडपंप लगे हैं। जिनमें से दो हैंडपंप पूरी तरह से खराब हैं। एक हैंडपंप ही लोगों की प्यास बुझाता है। दक्षिण दिशा में पांच हैंडपंप लगे हुए हैं, इनमें से मात्र दो चल रहे हैं, तीन खराब हैं। स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए बैठने के लिए बनी बेंच टूटी हैं। स्टेशन के उत्तर दिशा में मौजूद यात्री प्रतीक्षालय झाड़ियों से घिरा है। इन दिनों कुंभ मेला भी चल रहा है, जिसके चलते स्टेशन पर यात्रियों की संख्या भी काफी बढ़ी है। लेकिन यात्री असुविधाओं के बीच सफर को मजबूर हैं। हैंडपंप खराब हैं इनकी मरम्मत हो और शौचालय में दरवाजे लगाए जाने चाहिए।

मनीराम स्टेशन पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिम्मेदार इस पर ध्यान दें।

राकेश महर्षि दधीचि की नगरी में प्रतिदिन हजारों यात्री आते हैं, लेकिन यात्री सुविधाएं जीरो हैं।

सुरेश स्टेशन पर जो दिक्कतें हैं उनसे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। प्रयास है शीघ्र ही निदान हो और सुविधाएं बढ़ें।

रामजी राम, अधीक्षक रेलवे स्टेशन

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