सीतापुर : रेलवे स्टेशन कैंट, एक जमाने से खुद में एक अलग पहचान बनाए हुए है, लेकिन अब कैंट नाम इतिहास बनकर रह जाएगा। नए स्टेशन को सीतापुर जंक्शन के नाम से जाना जाएगा। यूं तो सीतापुर शहर में रेल सेवाएं अंग्रेजों के जमाने की हैं। इनमें छोटी रेल लाइन सीतापुर जंक्शन, कैंट रेलवे स्टेशन, कचेहरी हाल्ट व सिटी रेलवे स्टेशन शामिल हैं। छोटी लाइन को ब्राडगेज में जब परिवर्तित किया गया, तब छोटी लाइन के रेलवे स्टेशन का भी विस्तार किया गया। इसी विस्तार के तहत कैंट रेलवे स्टेशन का विलय छोटी लाइन से बड़ी लाइन में परिवर्तित हुए, सीतापुर जंक्शन में कर दिया गया। अब जब कैंट स्टेशन का विलय हो गया, तब उसका नाम भी सीतापुर जंक्शन में ही शामिल कर दिया गया। अब इस रेलवे स्टेशन को लोग सीतापुर जंक्शन के नाम से ही जानेंगे। सहायक मंडल अभियंता संजोग श्रीवास्तव कहते हैं, कि अब कैंट रेलवे स्टेशन सीतापुर जंक्शन के नाम से ही जाना जाएगा। यहां से रेल टिकट भी सीतापुर जंक्शन के नाम स ही काटे जाएंगे। पूरे स्टेशन का नाम रेल विभाग ने सीतापुर जंक्शन ही रखा है। ऐतिहासिक विरासत को दर्शाएगा नया स्टेशन

सीतापुर: अमान परिवर्तन करके छोटी लाइन रेलवे स्टेशन को बड़ी लाइन रेलवे स्टेशन में परिवर्तित कर दिया गया है। वहीं इस स्टेशन को नया लुक दिया गया है। रेलवे स्टेशन की दरों दीवारों पर सीतापुर की ऐतिहासिक स्थलियों के चित्र उकेरे जा रहे हैं। जिसमें सीतापुर के इतिहास की झलक साफ नजर आ रही है। इन दिनों जो दो रेलवे स्टेशनों को मिलाकर एक जंक्शन तैयार हुआ है, उस रेलवे स्टेशन पर सात रेल पटरिया हैं। स्टेशन खूबसूरत दिख सके, इसके लिए सीतापुर जंक्शन की केबिन पर ऐतिहासिक तीर्थ स्थल नैमिषारण्य, चक्रतीर्थ, मां ललिता देवी मंदिर, महार्षि दधीचि की नगरी मिश्रिख के चित्र व जानकारी का चित्रण किया जा रहा है। इससे जंक्शन की सुंदरता देखते ही बन पड़ रही है। सफर के दौरान सीतापुर जंक्शन से गुजरने वाले यात्री, सीतापुर की विरासत से भी रूबरू हो सकेंगे। माना जा रहा है कि इस चित्रण से सीतापुर में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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