विकास भवन की अनदेखी, बजट का रोना
निर्माण के 25 वर्ष बाद भी विकास भवन की मरम्मत के लिए शासन के पास बजट नहीं है। भवन की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। खिड़कियां उजड़ रही हैं और प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। प्रसाधन केंद्र भी बदहाल हैं लेकिन जिले के आला अफसर शासन से धन अवमुक्त नहीं करा पा रहे
सिद्धार्थनगर : निर्माण के 25 वर्ष बाद भी विकास भवन की मरम्मत के लिए शासन के पास बजट नहीं है। भवन की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। खिड़कियां उजड़ रही हैं और प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। प्रसाधन केंद्र भी बदहाल हैं, लेकिन जिले के आला अफसर शासन से धन अवमुक्त नहीं करा पा रहे। अपने निजी संसाधन से कुछ विभागों ने कमरों के अंदर की स्थिति कुछ ठीक तो करा लिया है, लेकिन बाहर का नजारा भूतबंगला से कम नहीं है।
विकास भवन में 22 विभाग और कर्मचारियों की संख्या करीब तीन सौ है। बावजूद सुविधा पर ध्यान नहीं है। भवन से प्लास्टर गिरने का डर बराबर बना रहता है। ऐसा नहीं है कि शासन से इसके लिए धन की मांग नहीं की गई। यूपी सिडको ने इस भवन की मरम्मत और पेंटिग के लिए 64 लाख की जरूरत बताई थी। सीडीओ ने आगणन संशोधन करने के लिए कहा। वित्तीय वर्ष 2017-18 में तत्कालीन सीडीओ अनिल कुमार मिश्र ने प्राकलन 62.29 लाख रुपये करते हुए बजट की मांग की। इसके दो माह बाद फिर सीडीओ की तरफ से शासन को पत्र भेजा गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 में दो बार तत्कालीन सीडीओ हर्षिता माथुर की तरफ से भी धन की मांग की गई, लेकिन शासन ने धन अवमुक्त नहीं किया। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सचिवालय में भ्रष्टाचार नहीं होता तो यह नौबत नहीं आती। किसी भी काम के लिए पहले वहां नजराना देना होता है। जो विभाग काम के हिस्से का कमीशन उपलब्ध कराते हैं, उनका बजट तुरंत रिलीज हो जाता है। एक दूसरे कर्मचारी ने कहा कि शौचालय और मूत्रालयों की स्थिति भी खराब है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बजट का हवाला देते हुए किनारा कस लेते हैं।
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हर पांच वर्ष पर होनी चाहिए रंगाई-पुताई
अभियंता संघ के जिलाध्यक्ष एसके त्रिपाठी का कहना है कि किसी भी भवन की रंगाई-पुताई निर्माण के पांच साल के अंतराल पर जरूर होनी चाहिए। ऐसा न होने पर सौ वर्ष तक चलने वाला भवन पचास-साठ वर्ष भी पार नहीं कर पाता।
........... विकास भवन की मरम्मत जरूरी है। शासन से धन क्यों नहीं अवमुक्त हो रहा है, इसके लिए एक बार फिर स्मरण पत्र भेजा जाएगा।
पुलकित गर्ग
सीडीओ, सिद्धार्थनगर
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