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    बाढ़ की तबाही के चार साल बाद भी नहीं मिटे निशान

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 14 Jan 2022 11:12 PM (IST)

    जमुनहा ब्लाक क्षेत्र में बाढ़ में धराशाई हो गए थे तीन पुल जिला व तहसील मुख्यालय की दूरी तय करने के लिए लंबा चक्कर लगाते हैं लोग।

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    बाढ़ की तबाही के चार साल बाद भी नहीं मिटे निशान

    संसू, जमुनहा(श्रावस्ती) : बाढ़ आपदा के चार साल बाद भी तबाही के निशान नहीं मिटे हैं। जमुनहा ब्लाक क्षेत्र में बाढ़ में तीन पुल धराशाई हो गए थे। तीन अलग-अलग रास्तों पर पुल न होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। जिला व तहसील मुख्यालय की दूरी तय करने के लिए लोगों को लंबा सफर करना पड़ता है। जमुनहा ब्लाक प्रमुख ने पुन: पुल निर्माण के लिए शासन को पत्र भी लिखा, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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    जमुनहा ब्लाक के नासिरगंज-लक्ष्मनपुर-सेमरहनिया मार्ग पर पोंदला पोंदली गांव के पास दो स्थानों पर बना पुल वर्ष 2017 में आई बाढ़ में धराशाई हो गया था। इसके बाद इस मार्ग पर धोबिहा, लक्ष्मनपुर सेमरहनिया, शमशेरगढ़, भलुहिया, जोगिया समेत छह गांव के लोगों का आवागमन बाधित हो गया। बरसात में गांव से बाहर आने-जाने के लिए इन लोगों का एक मात्र नाव ही सहारा है। इसी तरह कथरा माफी के हनुमान मंदिर के पास बरंगा मार्ग पर बना पुल सड़क समेत बह गया था। इसके बाद से बरंगा व हसनापुर गांव के लोगों को आवागमन की दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। भारत-नेपाल सीमा पर बसे गंगाभागड़ के पास बना पुल भी बाढ़ में बह गया था। मुराऊपुरवा के लोगों को बरसात में आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों ने कई बार उच्चाधिकारियों से पुल के मरम्मत की गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। लक्ष्मनपुर सेमरहनिया के समाजसेवी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि पुल मरम्मत के लिए कई बार शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जमुनहा एसडीएम सौरभ शुक्ला ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई प्रार्थना पत्र नहीं मिला है। यदि प्रार्थना पत्र आता है तो कार्रवाई अवश्य करेंगे।