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    अंग्रेजों का जुल्म सुनाते-सुनाते भर आई आंखे

    By Edited By:
    Updated: Sat, 08 Aug 2015 12:28 AM (IST)

    श्रावस्ती : अंग्रेजी शासन के दौरान आजादी की बात करना गुनाह माना जाता था। इससे लोग चाहकर भी डर के मार

    श्रावस्ती : अंग्रेजी शासन के दौरान आजादी की बात करना गुनाह माना जाता था। इससे लोग चाहकर भी डर के मारे घर के अंदर भी आजादी आंदोलन के समर्थन में आपस में बातें करने से कतराते थे। देश प्रेम के जज्बे से भरपूर ऐसे दीवानों की भी कमी नहीं थी जो अंग्रेजों की प्रताड़ना की परवाह न करके आजादी की अलख जगाने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। अंग्रेजी शासन के दौरान देशवासियों पर ढाए जा रहे जुल्म की कहानी सुनाते हैं पूर्व ब्लॉक प्रमुख व क्षेत्र के प्रतिष्ठित वयोवृद्ध समाज सेवी शिवकुमार खरे।

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    श्री खरे बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में पुलिस कर्मचारियों व अंग्रेज सैनिकों की ओर से देशवासियों पर बेवजह जुल्म ढाए जा रहे थे। आजादी आंदोलन की आग अंदर ही अंदर सुलग रही थी। सभी देशवासी आंदोलन को अंदर ही अंदर समर्थन देकर भारत को गुलामी की जंजीर से मुक्त कराने की कामना करते थे, लेकिन उन दिनों आंदोलन के समर्थन में कुछ बोल देना भी अपराध माना जाता था। आंदोलन को प्रत्यक्ष, अपरोक्ष समर्थन देने वालों को पुलिस प्रताड़ित करती थी। थाने में बुला कर पीटा जाता था जिससे लोग चाह कर भी आजादी आंदोलन से किनारा कर लेते थे। इसके बावजूद भी आजादी की अलख जगाने वालों की कमी नहीं थी। क्षेत्र में रघुनाथ प्रसाद, लालता प्रसाद, स्वामी दयाल जैसे दर्जनों लोग थे जो आजादी की हुंकार बेहिचक भरते थे। अक्सर इन लोगों को थाने में बुलाकर अंग्रेज सैनिक ले जाते थे और बेरहमी से पिटाई करते थे, फिर भी उनके कदम नहीं डगमगाए। श्री खरे बताते हैं कि कपूरथला स्टेट के मुलाजिम कर अदा न करने वालों को खूब प्रताड़ित करते थे। आजादी के समर्थन में कुछ बोल देने वाले बकाएदारों को तो विशेष रूप से प्रताड़ित किया जाता था। छात्र जीवन का एक वाकया सुनाते हुए खरे के आंखों में आंसू आ जाते हैं। वे छात्र जीवन में लौट आते हैं। कहते हैं- क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ में पढ़ रहा था। बात 1946 की है। आजाद ¨हद फौज के अधिकारियों ढिल्लन, सहगल व शहनवाज को अंग्रेज अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में अमीरूद्दौला पार्क लखनऊ में क्रांतिकारियों की सभा होनी थी। आजादी आंदोलन की आग कॉलेज में भी सुलग रही थी। छात्र सभा में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। प्राचार्य डॉ. हेंसन नहीं चाहते थे कि उनके कॉलेज से छात्र सभा में शामिल हों। तत्कालीन डीएसपी जमुना प्रसाद ने छात्रों पर घोड़ा दौड़ाने व लाठी चार्ज करवाने की धमकी दी, लेकिन छात्रों के जोश व जज्बे के आगे प्राचार्य की चली न प्रशासन की। लाठी चार्ज व घोड़ों के टापों की ठोकरें झेलते हुए कॉलेज के सभी छात्र सभा में पहुंच गए। आजादी के दीवानों को शत-शत नमन करते हुए वे कहते हैं कि आजादी का नारा बुलंद करने वाले महारथियों के हौसलों की बदौलत ही आज हम आजाद भारत की खुली हवा में सांस ले रहे हैं।