शामली में आया अनोखा मामला: ‘मृतक’ ने अफसरों से कहा, मैं जिंदा हूं... जांच में मौत ही शाश्वत सत्य निकला
शामली में एक अनोखा मामला सामने आया जहां एक बुजुर्ग ने अधिकारियों से शिकायत की कि उसे कागज़ों में मृत घोषित कर दिया गया है और उसकी पेंशन रोक दी गई है। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सचिव को निलंबित कर दिया लेकिन जांच में शिकायत झूठी निकली। अब अधिकारी शिकायतकर्ता की तलाश कर रहे हैं जबकि सचिव का निलंबन वापस ले लिया गया है।

अभिषेक कौशिक, जागरण, शामली। अंतिम सत्य मौत है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता है। गीता में भी कहा गया है कि जो पैदा हुआ है, उसकी मौत निश्चित है। लेकिन, शामली में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया। एक बुजुर्ग अफसरों के पास पहुंचा और कहा कि वह जिंदा है, जिसे कागजों में मृत दर्शा दिया गया है। उसकी पेंशन बंद हो गई है।
इसके बाद अधिकारियों ने इतनी तेजी दिखाई कि बिना जांच के ही सचिव को निलंबित भी कर दिया। मामले ने तूल पकड़ा और जांच बैठ गई। इसके बाद मौत एक बार फिर शाश्वत सत्य साबित हुई और शिकायत झूठी निकली। अब अधिकारी उस व्यक्ति को तलाश कर रहे हैं, जिसने झूठी शिकायत की थी।
शामली ब्लॉक के गांव लाक निवासी जगवीर सिंह की मौत से जुड़ा मामला
जनपद में पेंशनर के सत्यापन का कार्य चल रहा है। ग्राम सचिव हवा में जांच करते हैं, और रिपोर्ट लगा दी जाती है। इसमें लगातार लापरवाही की बातें सामने आती हैं। पिछले दिनों डीएम ने बैठक के दौरान दो सचिवों को चेतावनी भी दी थी। पिछले दिनों शामली ब्लॉक क्षेत्र के सचिव मानवेंद्र ने गांव लाक निवासी जगवीर पुत्र तिलक राम की रिपोर्ट लगाई कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। उनकी पेंशन बंद कर दी जाए।
एक बुजुर्ग ने की थी शिकायत, बिना जांच के ही सचिव को किया निलंबित
पिछले सप्ताह एक बुजुर्ग जिला समाज कल्याण अधिकारी के पास पहुंचे और कहा कि साहब, मैं जिंदा हूं। मुझे सचिव ने मृत दर्शा दिया है, और मेरी पेंशन भी बंद हो गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जानकारी मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी को दी।
मामला गंभीर मानते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने आनन-फानन में सचिव पर कार्रवाई का आदेश कर दिया, जिसके बाद उनको 22 अगस्त को निलंबित भी कर दिया गया। विभाग में मामला चर्चा का विषय बना तो जिला पंचायत राज अधिकारी संदीप अग्रवाल ने मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया।
जांच के बाद सच्चाई आई सामने, आदेश हुआ वापस
मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई थी। टीम को गांव में भेजा गया और मृतक के स्वजन के साथ ही ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्य से भी बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि मानवेंद्र की मौत हो चुकी है, और उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिखाया। इसके बाद स्वजन ने टीम को शपथ पत्र भी दिया।
प्रधान ने भी टीम को यही बताया कि जगवीर पुत्र तिलकराम की मृत्यु हो चुकी है। शिकायत झूठी निकलने और मौत की बात सही पाए जाने पर सचिव मानवेंद्र के निलंबन का आदेश वापस हुआ।
शिकायतकर्ता बुजुर्ग की तलाश जारी
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि एक बुजुर्ग जिला समाज कल्याण अधिकारी के पास आए थे, और उन्होंने खुद को जगवीर पुत्र तिलक राम बताया था। उन्होंने खुद के जिंदा होने की बात कही थी। अब उक्त बुजुर्ग की तलाश की जा रही है। आखिर वह कौन थे, जिन्होंने झूठी शिकायत दी थी।
सीडीओ ने बताया कि उन्होंने गांव और संबंधित के परिवार से जुड़ी हुई जानकारी सही दी, जिस पर अधिकारियों को उनकी बात पर विश्वास हो गया था।
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