शाहजहांपुर : जिले में कई देवी मंदिर ऐसे हैं, जहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। इन्हीं में एक है शहर का खिरनीबाग मुहल्ला स्थित कालीबाड़ी मंदिर। करीब डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है। यहां की मान्यता है कि दूसरे जिलों से भी लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं। शारदीय नवरात्र में यहां पर देवी की मूर्ति की स्थापना करायी जाती है। बंगाली समुदाय के लोग षष्ठी से लेकर नवमी तक देवी की अराधना करते हैं। मंदिर पुरानी वास्तुकला के आधार पर बना है। हालांकि काली देवी के मंदिर के आगे कुछ जीर्णोद्वार जरूर कराया गया है। यहां पर कई अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

1923 में हुई देवी की मूर्ति की स्थापना

जिस जगह पर यह मंदिर है वहां पर खिरनी के पेड़ों का बाग हुआ करता था। ओसीएफ में लेखाकार के पद पर कार्यरत पंडित राधिका प्रसाद धार्मिक प्रवृत्ति के थे। वह खाली समय में इस मंदिर में आकर बैठते थे। रिटायर होने के बाद सन् 1923 में उन्होंने यहां पर मां काली की मूर्ति की स्थापना करायी, जो कोलकाता स्थित दक्षिणेश्वर काली की मूर्ति का प्रतिरूप है।

मंदिर में लोग जो मनौतियां मांगते हैं वह पूरी हो जाती हैं। जिन नि:संतानों की गोद भर जाती है वह यहां पर बच्चों का मुंडन कराते हैं। नवविवाहित जोड़े शादी के बाद देवी का आशीर्वाद लेने जरूर आते हैं।

हेमेंद्र तिवारी, पुजारी

माता काली के दरबार से आज तक कोई खाली हाथ नहीं गया। यहां पर अगर 40 दिन तक संकल्प लेकर नियम से दीपक जलाएं तो उसके माता बड़े से बड़ा संकट हर लेती हैं।

अरविन्द।

Posted By: Jagran

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