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बखिरा झील में कछुओं की अवैध तस्करी का जाल फैला, दुर्लभ प्रजातियों पर खतरा

Published: Sun, 04 Oct 2026 12:19 PM (IST)

संतकबीरनगर की बखिरा झील में कछुओं की कथित तस्करी तेजी से बढ़ रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के अस्तित्व पर ...और पढ़ें

बखिरा झील। जागरण

बखिरा झील। जागरण

HighLights

  1. बखिरा झील में कछुओं की अवैध तस्करी का नेटवर्क फैला।

  2. टोना-टोटका और दवा हेतु दुर्लभ कछुओं का शिकार जारी।

  3. स्थानीय लोगों ने वन विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

हरिशंकर साहनी, बखिरा। ऐतिहासिक बखिरा झील (मोती झील) में कछुओं की कथित तस्करी का मामला इन दिनों चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टोना-टोटका और कथित रूप से दवा बनाने के लिए झील से बड़े पैमाने पर कछुओं का अवैध शिकार किया जा रहा है। इससे झील में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक बखिरा झील में 10 से लेकर 60 किलोग्राम तक वजन वाले कछुए पाए जाते हैं।

झील मे कैसे करते है शिकार

 बखिरा झील के किनारे के गांव के शिकारियो का झुंड रात में ही शिकार के लिए झील में निकल जाता है। गोरखपुर क्षेत्र के नेवास , गोविनापुर समेत कई जगह झील की तलहटी से उठाने वाले पानी के बुलबुले को देखकर शिकारी उस जगह पर जाल डालते है। उपर से लोहे के बांसा से उस पर वार करते है ।छोटे कछुओ को पकडने के लिए कटिया का भी प्रयोग करते है। कछुओ को मारकर सुखाते हैं। उसके बाद जरूरी सामान निकाल लेते हैं।

कई प्रांतों से आते हैं खरीददार ,बनती है दवाएं  

स्थानीय लोगों के अनुसार कलकत्ता, बंगाल समेत कई प्रांतों से कछुओं के खरीदार यहां पहुंचते हैं, जिसके चलते कथित तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है।
बताया जाता है कि कछुओं के चमड़े, मांस और तेल की मांग विभिन्न अवैध गतिविधियों तथा कथित औषधीय इस्तेमाल के लिए की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकार जारी रहा तो झील की जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

क्या कहते है नगरवासी

बखिरा निवासी दयाशंकर गुप्ता , चंद्र प्रकाश सिंह , मनीष कुमार , शुभम ने वन विभाग से झील क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, नियमित गश्त कराने और कछुओं के अवैध शिकार व तस्करी की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि झील की पहचान केवल जलाशय के रूप में नहीं, बल्कि समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्र के रूप में भी है, इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सख्ती जरूरी है।

रेंजर प्रिति पांडे ने कहा कि झील में दो टीमें बराबर गस्त कर रही है।कछुओं के अवैध शिकार या तस्करी की शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। वन्यजीवों के अवैध शिकार की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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बताया कि गत वर्ष 18 जुलाई को झील किनारे कछुओ का शिकार करते नवापार निवासी भीम पुत्र बहरैची को बन दरोगा विक्रम पासवान ने पकड़ा था। कछुआ पकड़ने का जाल बरामद कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

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