संतकबीरनगर में सील मदरसे की भूमि का अवैध बैनामा, मौलाना पर मुकदमा और पंजीकरण रद
खलीलाबाद के रजानगर स्थित कुल्लियातुल बनातिर रजविया मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने और सील करने के ...और पढ़ें
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मौलाना शमशुल हुदा खान।
HighLights
सील मदरसे की भूमि का अवैध बैनामा कराने का आरोप।
मौलाना शमशुल हुदा खान पर मुकदमा, पंजीकरण रद्द।
ब्रिटिश नागरिकता के बावजूद वेतन-पेंशन वसूली लंबित।
जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी स्थित रजानगर में संचालित कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी का मदरसा लंबे समय से प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है। मदरसे की भूमि को लेकर प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के बाद भी प्रबंध तंत्र पर उसी भूमि के एक हिस्से का बैनामा कराने का आरोप लगा। मामले में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ कोतवाली खलीलाबाद में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
मदरसा सोसायटी का पंजीकरण 11 नवंबर, 2013 को हुआ था। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार मौलाना शमशुल हुदा खान वित्त वर्ष 2013-14 से 2018-19 और 2020-21 से 2022-23 तक इसकी प्रबंध समिति में सरपरस्त रहा। मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ के रजिस्ट्रार ने 31 मार्च, 2017 को मदरसे को आलिया स्तर की मान्यता प्रदान की थी।
जिस भूमि और भवन पर मदरसे की मान्यता ली गई थी, उसका प्रबंधक मौलाना का पुत्र तौसीफ रजा है। अभिलेखों के अनुसार मौलाना और उसके पुत्र के नाम से मदरसे की भूमि का बैनामा 28 अगस्त, 2014 को हुआ था।
तीन गाटों की भूमि राज्य सरकार में हुई निहित
मदरसे की भूमि को लेकर डीएम कोर्ट ने 12 फरवरी, 2024 को आदेश जारी किया था। इसके तहत गाटा संख्या 154 की 0.0640 हेक्टेयर, गाटा संख्या 158 की 0.018975 हेक्टेयर और गाटा संख्या 245 की 0.040111 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई। इसके बाद एसडीएम खलीलाबाद ने संबंधित भूमि और भवन को सील कर दिया था।
सील होने के बाद बैनामे का आरोप
प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद आरोप है कि प्रबंध तंत्र ने सक्षम स्तर से अनुमति या आदेश प्राप्त किए बिना गाटा संख्या 154 के शेष हिस्से में बने भवन की भूमि का बैनामा पंजीकृत करा दिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र ने 21 जनवरी, 2025 को नोटिस जारी कर प्रबंध तंत्र से स्पष्टीकरण मांगा था।
इसके बाद फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स गोरखपुर के सहायक रजिस्ट्रार ने 10 अक्टूबर, 2025 को मदरसे का पंजीकरण निरस्त कर दिया। वहीं तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर दो नवंबर, 2025 को कोतवाली खलीलाबाद में मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले में अब प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई के बीच मदरसे की भूमि, उसके बैनामे और प्रबंध तंत्र की भूमिका से जुड़े अभिलेख महत्वपूर्ण हो गए हैं। संबंधित विभागों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
ब्रिटिश की नागरिकता के बाद भी उठाता रहा वेतन व पेंशन
दुधारा थाना क्षेत्र के देवरियालाल गांव का मूल निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान से वेतन और पेंशन के 53.46 लाख रुपये की वसूली अब तक नहीं हो सकी है। वह आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित मदरसा असरतिया में वर्ष 2007 से 2017 तक आलिया (हाईस्कूल) का सहायक अध्यापक रहा। इसके बाद उन्हें पेंशन मिलती रही।
बताया गया कि उसने दिसंबर 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल की थी। एसआइटी लखनऊ की जांच में उसकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट प्रयागराज के आदेश के क्रम में उसके वेतन और पेंशन की रकम की वसूली की जानी है।
पांच माह पहले शुरू हुई थी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
जिला प्रशासन और पुलिस ने अप्रैल 2026 में खलीलाबाद के गोश्त मंडी स्थित सील किए गए मदरसे को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की थी। दो दिन तक चली कार्रवाई में जिले के साथ गैर जनपद की पुलिस फोर्स भी मौजूद रही। मदरसे के मजबूत पिलर तोड़ने में बुलडोजर के सफल न होने पर गोरखपुर और सिद्धार्थनगर से कटर मशीन समेत अन्य उपकरण मंगाए गए थे।
हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है मौलाना की याचिका
मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित किए जाने के मामले में एसडीएम खलीलाबाद कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौलाना और उसके पुत्र के उपस्थित न होने की बात सामने आई। बाद में उसके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट प्रयागराज में वाद दायर किया। वर्तमान में सुनवाई के बाद उसकी याचिका खारिज हो चुकी है।
आठ सितंबर, 2026 को एसडीएम खलीलाबाद की ओर से नायब तहसीलदार यशव्रत सिंह अभिलेखों के साथ हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। उसके अधिवक्ता ने बहस की, लेकिन मामले से संबंधित जरूरी अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 सितंबर, 2026 तय करते हुए शपथ पत्र के साथ संपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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15 सितंबर को एसडीएम खलीलाबाद की ओर से दो राजस्व लेखपाल अभिलेखों के साथ न्यायालय में उपस्थित हुए। इस दिन भी मौलाना के अधिवक्ता जरूरी अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके और कुछ समय की मोहलत मांगी। बाद में उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
