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    वाहनों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण से बनता है स्मॉग

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 10 Nov 2017 01:27 AM (IST)

    चन्दौसी : स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही है। यह स्मॉक और फॉग से मिलकर बना है, यानि ध

    वाहनों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण से बनता है स्मॉग

    चन्दौसी : स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही है। यह स्मॉक और फॉग से मिलकर बना है, यानि धुआं युक्त कोहरा। इस तरह के वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स घुले होते हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण होता है। स्मॉग की समस्या उन क्षेत्रों में सबसे अधिक होती है जहां धुआं पैदा करने वाले कारखाने लगे होते हैं। जिस कारण प्रदूषण ज्यादा होता है। शहरों में सबसे ज्यादा स्मॉग होने का मुख्य कारण अधिक मात्रा में साधनों का होना होता है, क्योंकि इनसे निकलने वाला धुआं स्मॉग को बढ़ाता है। पिछले चार दिन से लगातार स्मॉग की समस्या हो रही है। ऐसी स्थिति में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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    इन बीमारियों के होने का रहता है खतरा

    चन्दौसी : डॉ.मनोज आहूजा ने बताया कि स्मॉग से फेफड़े और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। खांसी, जुकाम और सीने में दर्द की समस्या हो सकती है। दो साल के बड़े बच्चों में अस्थमा की बीमारी होने की संभावना रहती है। 15 साल से छोटे बच्चे ब्रोनकाइटिस बीमारी के अलावा स्किन संबंधी समस्या हो सकती है। बाल झड़ना ब्लड प्रेशर के मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक आने का खतरा बना रहता है। अस्थमा के रोगियों को अटैक पड़ने का खतरा भी रहता है।

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    क्या कहते हैं चिकित्सक

    चन्दौसी: संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा.संतोष गंगवार ने कहा कि अस्थमा के रोगियों को स्मॉग से बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे जिस जगह पर रहते हैं वहां की हवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी रखें। अगर आपके इलाके की हवा अधिक प्रदूषित है तो घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें और अगर बाहर जाना जरूरी है तो पूरी सतर्कता का पालन करें। आम लोग भी इन नियमों का पालन करेंगे तो सांस और फेफड़े संबंधी बीमारियों से बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में दिन छोटा होता है, ऐसे में अगर आप बाहर व्यायाम के लिए जाना चाहते हैं तो कोशिश करें कि सुबह जल्दी व्यायाम कर लें, क्योंकि सूर्य की किरणों के साथ स्मॉग और भी खतरनाक हो जाता है। ऐसे में घर के अंदर ही व्यायाम करें। घर के बाहर पार्क में जाकर व्यायाम करने से बचें। इसके अलावा जितना हो सके घर के अंदर ही रहें। उन्होंने कहा कि अस्थमा के रोगियों को खासकर बच्चों को स्मॉग से बचने के लिए मॉस्क पहनायें। अगर वे घर से बाहर जा रहे हैं तो बिना मॉस्क के न जायें, जो बच्चे अस्थमा से पीड़ित हैं उनके लिए यह मौसम अधिक खतरनाक होता है इसलिए बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क पहनायें। ठंड के मौसम में अस्थमा के रोगियों के लिए घर के बाहर की ह नहीं बल्कि घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में घर के अंदर की हवा साफ करने के लिए एअर फ्रेशनर घर पर लगायें। जब भी खिड़की या दरवाजे खोलें पहले बाहर की हवा की गुणवत्ता जांच लें। अगर जरूरी न हो तो दरवाजे और खिड़की बंद रखें। अगर समस्या अधिक हो रही हो तो चिकित्सक से जरूर संपर्क करें तथा उसकी सलाह से ही काम करें।

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    योग शिक्षक बोले

    चन्दौसी : योग शिक्षक संजीव उपाध्याय ने कहा कि आज पूरा विश्व वायु प्रदूषण से जूझ रहा है, जिस कारण अनेकों जहरीली गैसे वायु में मिल जाती है। श्वास के द्वारा वह शरीर के अंदर जाकर अस्थमा, चर्म रोग, कैंसर, टीवी आदि गंभीर बीमारियां पैदा करती है पिछले कई दिनों से आकाश में छाई हुई धुंध जो कोहरा व जहरीले प्रदूषित धुएं का ही रूप है, जिसको स्मॉग कहते हैं। इससे बचने के लिए घर से बाहर सुबह के समय न निकलना ही बेहतर है जिससे इसका दुष्प्रभाव आपके शरीर पर न पड़े। वायु प्रदूषण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। फेफड़े, लीबर, त्वचा पर इसका खराब असर पड़ता है। अगर ऐसे समय योग की क्रियाएं की जाए तो प्रदूषित वायु के दुष्प्रभाव से शरीर को बचाया जा सकता है। योग की क्रियाओं में मुख्य रूप से सूर्य नमस्कार, भ्रस्तिका, कपाल भांति, नाड़ी शोधन, प्राणायाम, उज्जायी का अभ्यास किया जाए तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। फेफड़े, लीवर मजबूत होकर रक्त की शुद्धि होती है। अत: वायु प्रदूषण में योग के अतिरिक्त स्वस्थ रहने का अन्य कोई विकल्प नहीं है।