Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    डिजिटल या आनलाइन संचार का शिष्टाचार

    By Edited By:
    Updated: Wed, 14 Sep 2016 01:17 AM (IST)

    वर्तमान युग में डिजिटल या ऑनलाइन संचार की उपयोगिता किसी से छिपी हुई नहीं है जिसने सारे संसार को एक स

    वर्तमान युग में डिजिटल या ऑनलाइन संचार की उपयोगिता किसी से छिपी हुई नहीं है जिसने सारे संसार को एक सूत्र में बांध दिया है। अब दुनियां दूर नहीं, दुनियां मेरी मुट्ठी में है, जैसी बातों को डिजिटल या ऑनलाइन संचार क्रांति ने यथार्थ में बदल दिया है। आज पूरा समाज इसका लाभ ले रहा है। वर्तमान में वर्चुअल व‌र्ल्ड का सम्मोहन बच्चों और युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। इंटरनेट की सोशल नेट वर्किंग से सभी कार्य आसान हो गए हैं। अब दुनियां बहुत छोटी हो गई है। कोई भी कार्य सुगमता से घर बैठे किया जा सकता है। डिजिटल या ऑनलाइन संचार क्रांति ने इंटरनेट के माध्यम से असम्भव शब्द को निरर्थक बना दिया है। वर्तमान युग विज्ञान का युग है। वैज्ञानिकों ने नित नए आविष्कार करके सम्पूर्ण संसार के व्यक्तियों को परस्पर इतना नजदीक ला दिया है कि अब दूरी महसूस ही नहीं होती। अविष्कारों में कम्प्यूटर एवं इंटरनेट ऐसा आविष्कार है जिसे यांत्रिक मस्तिष्क भी कहा जा सकता है। कम्प्यूटर, लैपटाप या मोबाइल फोन में इंटरनेट की सुविधा से विश्व में होने वाली घटनाओं की जानकारी तुरंत मिल जाती है। सोशल मीडिया ने दुनिया को ही बदल दिया है। गूगल, याहू, फेसबुक, ट्विटर ने विश्व के देशों को बहुत समीप ला दिया है। वर्तमान में नन्हे-मुन्ने बच्चों को प्रारम्भ से ही ई-क्लास अर्थात स्मार्ट क्लास के माध्यम से ही शिक्षा प्रदान की जा रही है जिससे बच्चों में शुरू से प्रतिस्पर्धात्मक वैज्ञानिक सोच का प्रादुर्भाव सहज ही हो जाता है। इसी का परिणाम है कि डिजिटल सभी यंत्रों का प्रयोग अब बच्चे बड़ों की तुलना में अधिक अच्छे ढंग से कर रहे हैं। ऑनलाइन संचार माध्यमों से अब सभी कार्य इतने सुगमता से पूर्ण हो रहे हैं। इनसे त्रुटियों की संभावना अत्यन्त कम हो जाने के साथ ही मानव श्रम एवं समय की भी बहुत बचत हो रही है। विज्ञान ने अब काफी प्रगति कर ली है। नये-नये अविष्कार मनुष्य को आश्चर्यचकित कर रहे हैं। विज्ञान ने कितनी भी प्रगति कर ली हो, एक से बढ़कर एक कितने ही आश्चर्य जनक अविष्कार क्यों न कर लिए हो किन्तु भारत की पुरानी वैज्ञानिक प्रगति से अभी बहुत पीछे हैं। पुराने समय में हमारे रहते थे। भगवान राम के समय का पुष्पक विमान जो मनकी गति से चलता था। मनमाफिक सोचने भर से ही वह छोटा अथवा बड़ा किया जा सकता था। विश्व की सभी सुविधाएं विमान में मौजूद थी। विमान यंत्रों से चलते थे। इसमें ईंधन की आवश्यकता नहीं होती थी। अब हमने एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट विमान बना लिए हैं लेकिन पुष्पक विमान की तकनीक तक नहीं पहुंच पाये हैं। इसी प्रकार पुराने समय के अग्निबाण की तुलना में अब की बनी मिसाइलें अभी बहुत पीछे है। बाणों से ही वर्षा, आंधी, तूफान आदि लाये जा सकते थे जो अभी केवल कल्पना हैं। दूर दर्शन, इन्टरनेट की तकनीक पुराने समय में भी मौजूद थी। अभी हमें बहुत आगे जाना है। विश्व आगे जाने के लिए भारत की ओर देख रहा है। डिजिटल या ऑनलाइन संचार क्रांति से जहां इसके अनगिनत लाभ हैं वहीं कुछ हानियां भी है। हम बच्चों में ऑनलाइन टेक्नालाजी के सावधानी पूर्ण उपयोग के प्रति संवेदनशीलता उत्पन्न करें। इसके लिए माता-पिता को स्वयं जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें यह जानकारी रखनी होगी कि सोशल साइट पर बच्चों की मित्र मंडली में कौन-कौन है। वह इसमें कितना समय व्यतीत कर रहा है। इंटरनेट पर वह क्या सर्च करता है। अधिक अच्छा होगा कि कम्प्यूटर ऐसे स्थान पर हो जहां से स्पष्ट दिखाई दे। समय-समय पर बच्चों के मोबाइल फोन, लैपटाप और टैबलेट चैक करते रहना चाहिए। इस संदर्भ में बच्चों की काउंस¨लग भी जरुरी है। माता-पिता की यह भी जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों को जागरूक कर उनके अंदर यह समझ विकसित करें कि इसके प्रयोग से किस तरह वह अपने व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं। शिक्षकों का यह भी दायित्व बनता है कि वह कम्प्यूटर शिक्षा देते समय बच्चों को इसके लाभ के साथ-साथ हानियों से भी अवगत कराये।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    निवेदिता नन्दन, प्रधानाचार्य, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल, औरछी चौराहा,

    ::::::::::::::::::

    डिजिटल या ऑनलाइन संचार क्रांति ने आज पूरी दुनियां को एक सूत्र में बांध दिया है। वैसे तो प्रत्येक क्षेत्र में इसने अपनी उपयोगिता सिद्ध की है, किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में भी इसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता। दुनियां का कोई भी वर्ग इससे अछूता नहीं है। सभी इनका पूरा फायदा उठा रहे हैं। डिजिटल संचार क्रांति ने आधुनिक समाज के विकास को नई दिशा दी है। आज की टेक्नालाजी के साथ हमें और समाज को सामंजस्य स्थापित करना पड़ेगा। अन्यथा हम पिछड़ जायेंगे।

    निष्काम नन्दन, डायरेक्टर, ग्लोबल हैरिटेज इंटरनेशनल स्कूल

    ::::::::::::::::::::::

    विज्ञान ने हमारा जीवन सुखमय बना दिया है। डिजिटल या ऑनलाइन संचार क्रांति से दुनियां छोटी होकर हमारी मुट्ठी में आ गई है। हम निरंतर उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं। सूचना माध्यम के रूप में इन्टरनेट ने पूरी दुनियां में तहलका मचा दिया है। व्हाट्स एप, फेसबुक, ट्विटर आदि के माध्यम से आज घर बैठे दुनियां के किसी भी कोने में कोई भी सूचना भेज सकते हैं या फिर मंगा सकते हैं। ई-कामर्स में इंटरनेट एवं ऑनलाइन संचार का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

    पूर्वा रंजन, अध्यापिका, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल

    वर्जन -

    बच्चों में बचपन से ही तर्कसंगत तथा वैज्ञानिक सोच से कार्य करने की आदत डालनी चाहिए। तभी बच्चे डिजिटल या ऑनलाइन संचार साधनों का सही उपयोग करते हुए बुलंदी पर पहुंच सकते हैं। वर्तमान युग में विद्यार्थी अपनी समस्याओं को शिक्षक के सम्मुख न रखकर नेट का सहारा लेता है। समय की कमी के कारण लोग ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। व्यापारी भी ऑनलाइन या इन्टरनेट के माध्यम से आज प्रगति के पथ पर है। किन्तु इन सभी अच्छाइयों के साथ-साथ बच्चों को अच्छे संस्कारों की शिक्षा देना भी आवश्यक है। इनसे होने वाली हानियों से भी बच्चों को बताना अनिवार्य है।

    अनुराधा शर्मा, अध्यापिका, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल

    वर्जन -

    आज संसार के सभी भाग डिजिटल या ऑनलाइन संचार साधनों के द्वारा आपस में जुड़े हुए हैं। इनके द्वारा हम पलक झपकते ही कोई भी सूचना पाने के साथ ही सात समुंदर पर पहुंचा भी सकते हैं। इंटरनेट का उपयोग हमें ज्ञानार्जन के लिए करना चाहिए। ऑनलाइन खरीदारी के समय भी सतर्कता बरतनी आवश्यक है। वहीं हम इंटरनेट पर पूरी तरह आश्रित न हो। अपने ज्ञान के भंडार को विस्तृत करने में ही इंटरनेट का उपयोग करें।

    माधवी वाष्र्णेय, छात्रा कक्षा सात, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल

    वर्जन -

    इस वैज्ञानिक युग में संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं। हमें अपने माता-पिता के साथ ही बड़े बुजुर्गों की निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए। जीवन में अच्छी सोच रखनी चाहिए। जो वैज्ञानिक युग के समानान्तर होनी चाहिए। इसलिए हमें यह सोच कर चलना चाहिए कि हम अपने लिए ही नहीं दूसरों के लिए भी कुछ कर सके। ऐसा सिर्फ तर्क संगत वैज्ञानिक सोच के साथ ही हो सकता है। डिजिटल या ऑनलाइन संचार साधनों का भी हमें सकारात्मकता के साथ भरपूर लाभ उठाना चाहिए।

    दिशांक वशिष्ठ, छात्र कक्षा सात, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल

    वर्जन -

    वर्तमान युग विज्ञान का युग है। वैज्ञानिक अविष्कारों में डिजिटल का ऑनलाइन संचार साधनों की क्रांति ने आज का जीवन अत्यन्त सरल बना दिया है। सारी समस्याएं पलक झपकते ही दूर हो जाती है। इन्टरनेट का उपयोग अपना ज्ञान बढ़ाने एवं समस्याओं के हल के लिए ही किया जाना चाहिए। इन आधुनिक उपकरणों से होने वाली हानियों के प्रति सचेत रहकर ही हम संस्कारवान बने रह सकते हैं।

    शिखर वाष्र्णेय, छात्रा कक्षा सात, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल

    वर्जन -

    ऑनलाइन संचार माध्यमों से अब सभी कार्य इतनी सुगमता से पूर्ण हो रहे हैं। जिनसे त्रुटियों की संभावना न के बराबर ही रहती है। अब विज्ञान ने काफी प्रगति कर ली है। इन सभी सुविधाओं का हम सतर्क रहकर पूर्ण उपयोग कर सकते हैं। इनके हानिकारक पहल से हमें बच कर रहना है। अपनों से बड़ों के निर्देशन में यदि हम इन समस्त सुविधाओं का उपयोग करेंगे, तो हमारा भविष्य सदैव सुखमय रहेगा।

    राधिका सिसौदिया, छात्रा कक्षा छह, ग्लोबल हैरिटेज इन्टरनेशनल स्कूल,