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नकली सिक्कों का मास्टरमाइंड उपकार जेल से रिहा हाेने पर फिर खड़ी कर देता था नकली 'टकसाल', कई राज्यों में था नेटवर्क

By Deepak Prajapati Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 17 Sep 2026 06:54 PM (IST)

Saharanpur News: नकली सिक्कों का मास्टरमाइंड उपकार लूथरा जेल से छूटने के बाद फिर से यह अवैध काम शुरू देता था और लगातार ठिकाने बदलता था। ।

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का राजफाश किया था

  2. उपकार लूथरा अपने भाई स्वीकार के साथ मिलकर करता था यह काम

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। एक लाख 29 हजार रुपये के 20-20 रुपयों के बने नकली सिक्कों व साढे़ चार लाख रुपये के अधबने सिक्कों के साथ पकडा गया मोहाली निवासी उपकार लूथरा अपने भाई स्वीकार लूथरा के साथ मिलकर यह नकली टकसाल चलाता था।

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व पंजाब पुलिस के पकड़े जाने के बाद उपकार जेल से रिहा होते ही फिर से अपना नेटवर्क खड़ा करता था और फिर से नकली सिक्के की नई व फर्जी टकसाल बना लेता था। कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसकी रणनीति हर बार ठिकाना बदलने की रहती थी। एक स्थान पर कुछ दिन काम करने के बाद वह अपने साथियों के साथ दूसरी जगह चला जाता था।

नगर कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने 12 सितंबर को नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का राजफाश किया था। पुलिस ने पांच आरोपितों को भी गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का मुख्य आरोपित उपकार लूथरा है। जांच में सामने आया है कि उपकार अपने भाई स्वीकार के साथ मिलकर अलग-अलग प्रदेशों में नकली सिक्के बनाने का काम करता था।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को नेटवर्क के लिए प्रमुख ठिकानों के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। आरोपित एक ही स्थान पर लंबे समय तक नहीं रुकते थे, जिससे स्थानीय पुलिस को उनकी गतिविधियों की भनक लगने के बावजूद उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता था।

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पुलिस के मुताबिक, पहचान छिपाने के लिए दोनों भाई लगातार अपने रहने के ठिकाने बदलते थे। किराये के मकान में कुछ समय रहने के बाद नया घर तलाश लिया जाता था। यही रणनीति वाहनों को लेकर भी अपनाई जाती थी। अलग-अलग स्थानों पर अलग वाहन इस्तेमाल करने से पुलिस की निगरानी से बचने में उन्हें मदद मिलती थी।

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आरोपितों की एक बड़ी रणनीति प्रदेशों की सीमाओं का फायदा उठाना भी बताई जा रही है। पुलिस की घेराबंदी की जानकारी मिलते ही वे दूसरे प्रदेश या सीमावर्ती जिले में चले जाते थे। कुछ ही दूरी पर प्रदेश की सीमा बदल जाने के कारण जांच टीमों के लिए लगातार उनका पीछा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था।

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पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि नई जगह पर टकसाल स्थापित करने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाते थे और कुछ दिनों तक वहां काम करने के बाद पूरा ठिकाना बदल दिया जाता था। इस तरह नेटवर्क का संचालन एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित होता रहता था। अब पुलिस फरार तीन आरोपितों की गिरफ्तारी में जुटी हुई है। इसके साथ ही आरोपित उपकार लूथरा के पुराने ठिकानों, संपर्कों, वाहनों और आर्थिक लेनदेन की कड़ियां जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।