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    सहारनपुर: सपा महानगर प्रभारी समेत 11 के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा, प्रॉपर्टी को लेकर चल रहा विवाद

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:25 PM (IST)

    सहारनपुर के शक्तिनगर स्थित मंदिर महादेव की संपत्ति विवाद में सपा नेता टिंकू अरोड़ा समेत 11 लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप है कि विक्रम सिंह ने फर्जी वसीयत के आधार पर मंदिर की संपत्ति हड़पने की कोशिश की। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कई मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं।

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    सपा महानगर प्रभारी समेत 11 के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा

    जागरण संवाददाता, सहारनपुर। शक्तिनगर स्थित मंदिर महादेव की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में सपा महानगर प्रभारी व पार्षद टिंकू अरोड़ा समेत 11 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। मंदिर की संपत्ति के कई मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं। वहीं हाल ही में विभिन्न थानों में कई नए मुकदमे भी दर्ज हुए हैं।

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    जनकपुरी थाना क्षेत्र के देहरादून रोड पर गोविंद विहार निवासी पार्थ ग्रोवर ने बताया कि नुमाइश कैंप के शक्तिनगर स्थित मंदिर महादेव का निर्माण खत्री समाज के लोगों ने कराया था। अभिलेखों में भी यह संपत्ति मंदिर के नाम दर्ज है।

    मंदिर के प्रबंधक आशाराम पुत्र नाथीराम निवासी नुमाइश कैंप वर्ष 1954 में लापता हो गए थे। आरोप है कि विक्रम सिंह पुत्र भुवन प्रकाश निवासी ग्राम पुंवारका व उसके स्वजन ने आपस में साज करके सलेमपुर भूखडी थाना कोतवाली देहात निवासी फर्जी आशाराम को खड़ा करके 13 दिसंबर 1995 को फर्जी वसीयत अपने घर पर तैयार की, जिसमें उक्त सम्पत्ति अपने बजुर्गों से प्राप्त होना बताया।

    विक्रम ने उक्त वसीयत को अपने पिता के हक करते हुए खुद को इस फर्जी वसीयत का गवाह बनाया। श्री महादेव बनाम डा. जय शंकर प्रसाद वाद में सुनवाई कर रही अदालत ने उक्त फर्जी आशाराम को न्यायालय में तारीख पर उपस्थित होने के लिए कहा तो वह उपस्थित नहीं हुआ।

    विक्रम के पिता की ओर से कथित आशाराम की मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधी प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने दावा निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद मन्दिर की सम्पत्ति को हड़पने की नियत से विक्रम ने अपने पक्ष में 2011 में वसीयत करा ली।

    इसके बाद मंदिर महादेव बनाम कुमारी देहुती का दावा प्रस्तुत करते हुए संपत्ति को अपनी बताया और कोर्ट से डिग्री करा ली। इतना ही नहीं मंदिर में दान में आए रुपये और जेवरात आदि को भी अपने घर ले जा रहे हैं।

    वर्ष 2019 में दायर वाद में विक्रम ने वर्ष 1957 से उक्त सम्पत्ति पर पूर्णतया कब्जा कुमारी देहुती का बताया था, जिसमें वर्ष 2022 में राजीनामा कर लिया गया।

    वहीं वर्ष 2023 में दायर वाद में विक्रम ने सपा महानगर अध्यक्ष व पार्षद अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा, राजेश कुमार और संजीव ग्रोवर का कब्जा दर्शा दिया। इसके लिए कई दस्तावेज फर्जी तैयार किए गए। निमार्ण सामग्री के फर्जी पर्चे काटे गए, जिसकी लिखाई एक समान है। कई जगह वर्ष 2020 का वर्ष 2000 किया गया है।

    पुलिस के कार्रवाई न करने पर पार्थ ग्रोवर ने कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली देहात में विक्रम सिंह, उसके भाई उदय सिंह, सपा नेता अभिषेक अरोड़ा, राजेश कुमार व संजीव ग्रोवर और छह अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। थाना प्रभारी कपिल देव ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।