दीपावली से पहले सहारनपुर में सजा पटाखा बाजार: पांच जगहों पर लगेंगी 169 अस्थायी दुकानें, चेक करें लोकेशन
सहारनपुर में दीपावली के लिए 6 से 8 नवंबर तक 169 अस्थायी पटाखा दुकानें पांच निर्धारित स्थानों पर लगेंगी। जिला ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सहारनपुर में 169 अस्थायी पटाखा दुकानें पांच स्थानों पर लगेंगी।
दीपावली पर्व पर 6 से 8 नवंबर तक सजेगा बाजार।
सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य, ग्रीन पटाखों पर विशेष जोर।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। दीपावली पर्व पर आतिशबाजी की बिक्री को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। नगर क्षेत्र में पांच निर्धारित स्थानों पर अस्थायी आतिशबाजी की दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार चौहान के निर्देश पर ये लाइसेंस छह नवंबर से आठ नवंबर तक यानी केवल तीन दिन के लिए जारी किए जाएंगे। निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दीपावली के पर्व पर आतिशबाजी का भी खूब प्रयोग किया जाता है, जिसको लेकर जिला प्रशासन ने आतिशबाजी के बाजार को लगाने के लिए दुकानों को लगाने का स्थान चिंहित कर लिया है।
पांचों स्थानों पर कुल 169 अस्थायी दुकानें
प्रभारी अधिकारी आयुध कुलदीप सिंह ने बताया कि थाना जनकपुरी क्षेत्र के महाराज सिंह कॉलेज ग्राउंड में 45 दुकानें, थाना सदर बाजार क्षेत्र के जेवी जैन डिग्री कॉलेज मैदान में 36 दुकानें, कोतवाली नगर क्षेत्र के जीजीआईसी ग्राउंड में 26 दुकानें आवंटित की गई हैं।
इसके अलावा थाना कुतुबशेर क्षेत्र में सर्किट हाउस के सामने खाली मैदान में 37 और थाना सदर बाजार क्षेत्र में आईटीआई दिल्ली रोड के खाली मैदान में 25 दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार पांचों स्थानों पर कुल 169 अस्थायी दुकानें लगाई जाएंगी।
सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने बताया कि लाइसेंसधारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन्हें अपने कार्यस्थल पर स्वयं उपस्थित रहकर आतिशबाजी की बिक्री करनी होगी। यदि किसी दुकान पर लाइसेंसधारी के स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति आतिशबाजी बेचता पाया गया तो तत्काल लाइसेंस निरस्त करने के साथ आतिशबाजी सामग्री जब्त कर ली जाएगी।
इसके साथ ही सभी दुकानदारों को अग्निशमन विभाग की ओर से समय-समय पर जारी सुरक्षा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
साधारण पटाखों के नुकसान
- पटाखों के जलने से सल्फर डाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड जैसी खतरनाक गैसें निकलती हैं।
- इनमें तांबा, कैडमियम, जस्ता (जिंक) और लेड (सीसा) जैसे भारी धातु व रसायन होते हैं।
- अति सूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और क्रानिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से दिल या फेफड़े के मरीजों को इनसे गंभीर खतरा होता है।
ग्रीन पटाखों के फायदे
- ग्रीन पटाखों से पर्यावरण और सेहत को कई फायदे होते हैं, जो पारंपरिक पटाखों के मुकाबले इन्हें बेहतर बनाते हैं।
- ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में लगभग 30 से 50 प्रतिशत कम वायु प्रदूषण होता है।
- हानिकारक गैसों में कमी: इनमें सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड जैसी जहरीली गैसों का उत्सर्जन काफी कम होता है।
- इनके निर्माण में बेरियम, सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसी खतरनाक भारी धातुओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
- पारंपरिक पटाखे जहां काफी तेज धमाका करीब 160 डेसिबल तक करते हैं, वहीं ग्रीन पटाखों की आवाज नियंत्रित और कम लगभग 110 से 125 डेसिबल तक होती है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी कम होती है।
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