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    जन्म से पूर्व और मृत्यु तक संस्कार अहम: स्वामी राघवाचार्य

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 06 Feb 2020 06:11 AM (IST)

    अष्टोत्तर शत् नवकुंडीय होमात्मक लक्ष्मी महायज्ञ श्रीमद् भागवत मूल पाठ कथा में प्रवचन वर्षा जयकारों और भक्तिभजनों से वातावरण धर्ममय जागरण संवाददाता सहारनपुर जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि जन्म लेने से पहले और मरने के बाद तक मनुष्य जीवन में संस्कार की महत्ता होती है। कुल 4

    जन्म से पूर्व और मृत्यु तक संस्कार अहम: स्वामी राघवाचार्य

    सहारनपुर, जेएनएन। जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि जन्म लेने से पहले और मृत्यु के बाद तक मनुष्य जीवन में संस्कार की महत्ता होती है। कुल 48 संस्कारों में से आज हमें 16 संस्कार भी याद नहीं है। यही कारण है कि आज हम संस्कारहीन होते जा रहे हैं।

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    दिल्ली रोड साउथ सिटी में प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत मूल पाठ कथा में प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा कि जन्म लेने से पहले और मरने के बाद तक मनुष्य जीवन में संस्कार की महत्ता होती है। जन्म लेने से पहले तीन संस्कार हो जाते हैं। कुल 48 प्रकार के संस्कार होते हैं लेकिन उनमें 16 संस्कार महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि हमें 16 संस्कार भी याद नहीं है। सामान्य रूप से लोगों को सिर्फ दो ही संस्कार याद है। एक विवाह संस्कार और दूसरा अंतिम संस्कार। यही कारण है कि आज हम संस्कारहीन होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें देव और पितरों के कार्यों को समय-समय पर करते रहना चाहिए। यही हमारी कृतज्ञता है सनातन धर्म क्या है? वाल्मीकि रामायण में महर्षि वाल्मीकि कहते हैं कि किसी ने मेरे लिए कुछ किया है तो उसके लिए मैं भी कुछ करूं, मेरा भी कोई दायित्व बनता है, यह दायित्व बोध ही सनातन धर्म है।

    जगतगुरु ने कहा कि पितरों के कार्य में वाक्य शुद्धि और देवताओं के कार्य में श्रद्धा की महत्ता होती है, इसका अर्थ यह है कि अगर आप देवताओं का काम कर रहे हैं और आपसे कोई त्रुटि हो जाती है तो भी आपको फल मिलेगा लेकिन पितरों के कार्यों में आपके वाक्य और कार्य दोनों का महत्व है। वाक्य की अशुद्धि होगी और आप श्राद्ध करेंगे तो वह श्राद्ध बेकार हैं इसीलिए कहते हैं कि श्राद्ध करते समय विद्वान ब्राह्मण का चयन करना चाहिए।

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    आयोजन में पहुंचे कई मनीषी

    सहारनपुर: श्रीमद् भागवत कथा में तीर्थ नगरी शुक्रताल से गुरुदत्त ब्रह्मचारी महाराज पहुंचे। उनके साथ विद्यालय के विद्यार्थी भी कथा महोत्सव में पहुंचे। शुक्रताल स्थित हनुमंत धाम से हिदी के महंत केशवानंद के प्रतिनिधि के रूप में केडी शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। कुरुक्षेत्र से सुख देवाचार्य महाराज ने भी कथाश्रवण कर रहे श्रद्धालुओं को आशीर्वचन कहे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बहुत बड़ा वरदान है इसे व्यर्थ नहीं करना चाहिए। यज्ञ मंडप का पूजन

    सहारनपुर: अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत अष्टादश पुराणों का पाठ एवं नवकुंडीय होमात्मक महालक्ष्मी यज्ञ में सुबह यज्ञ मंडल का पूजन किया गया।चारों वेदी के मंत्रों का पाठ किया गया।। यज्ञ में नौ कुंड बनाए गए।यज्ञशाला में मंत्रोचारण यज्ञाचाचर्य आचार्य अमित भारद्वाज, पं.कमलनयन वेदपाठी, पं.अंकित शर्मा, पं.कृष्ण गोपाल, पं.सुधांशु शर्मा ऋग्वेदी शामिल रहे। कथा में ये रहे मौजूद

    कथा में मुख्य रूप से ज्योतिषाचार्य हरिशंकर गौनियाल, बीजेपी के पूर्व जिलादयक्ष सुरेंद्र शर्मा, पूर्व महामंत्री अनिल शर्मा, ओमकार दीक्षित, सीए योगेश कुमार गर्ग, नरेश हरजाई, शांति स्वरूप हरजाई, ओमप्रकाश फुटेला, राजीव वधवा, प्रवीण शर्मा, लोकमणि त्यागी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।