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    दोस्ती एक अनमोल उपहार और अटूट विश्वास

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 08 Sep 2021 11:28 PM (IST)

    दोस्ती एक अनमोल धन के भांति होती है जो समय आने पर आपकी मदद करता है। सच्ची मित्रता निस्वार्थ होती है जिसमें किसी का कोई स्वार्थ नही छिपा होता है। मित्रता ना जाति देखती है और ना ही धर्म वह केवल विश्वास और प्रेम की भूखी होती है।

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    दोस्ती एक अनमोल उपहार और अटूट विश्वास

    सहारनपुर, जेएनएन। दोस्ती एक अनमोल धन के भांति होती है जो समय आने पर आपकी मदद करता है। सच्ची मित्रता नि:स्वार्थ होती है जिसमें किसी का कोई स्वार्थ नही छिपा होता है। मित्रता ना जाति देखती है और ना ही धर्म, वह केवल विश्वास और प्रेम की भूखी होती है। मित्रता किसी के भी बीच हो सकती है। चाहे वह किसी भी धर्म या जाति के मानने वाले हो। मित्रता की कोई बंदिश नही है। एक अमीर भी किसी गरीब का मित्र हो सकता है। मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन में कई रिश्ते निभाता है। एक पुत्र या पुत्री, एक बाप, एक मां, पति या पत्नी इत्यादि कई रिश्ते इंसान सामाजिक परिवेश में निभाता है। दोस्ती का रिश्ता ना जन्म से होता है और न ही विवाह के बाद बाद होता है। यह रिश्ता अटूट विश्वास और प्रेम से आता है।

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    हमारे जीवन के कई खट्टे मीठे पल दोस्तों के साथ गुजरे हुए होते है। हर व्यक्ति के जीवन को साकार करती है। दुनिया में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसका कोई दोस्त न हो। मित्रता या दोस्ती का सिलसिला स्कूल के दिनों से चलता है जो उम्र भर रहता है। बचपन से बुढ़ापे तक आपके दोस्त बनते रहते है।

    कोई उम्र भर के लिए दोस्त होता है, तो कोई केवल जवानी या स्कूल कालेज तक ही मित्रता निभाता है। उम्र के हर पड़ाव पर मित्र बनते है। स्कूल के दोस्त स्कूल तक या कालेज के दोस्त कालेज तक ही रहे, यह मित्रता नही है। सच्ची मित्रता सम्पूर्ण जीवन में रहती है। सच्चे दोस्त अच्छे और बुरे दोनों वक्त आपके साथ होते है जब आपके खून के रिश्ते आपसे दूर होते है, तब आपका सच्चा मित्र ही काम आता है। मित्रता एक ऐसा संबंध है जो हमें नही बताया जाता और हम इसे चुनते है। मित्रता में गहराई होनी चाहिए। जितना गहरा रिश्ता होता है, उतनी ही मजबूत उसकी नींव होती है। दोस्ती के लिए यह जरूरी नही है कि दूसरा व्यक्ति आपकी तरह सोच रखता हो इसलिए विपरीत सोच वालों के बीच भी मित्रता हो जाती है।कृष्ण और सुदामा की मित्रता को कौन नही जानता है। एक तरफ द्वारका के राजा श्रीकृष्ण और दूसरी तरफ भिक्षा

    मांगकर गुजारा करने वाले सुदामा की कहानी हर बच्चे बच्चे को पता है। श्रीकृष्ण ने बचपन के मित्र सुदामा से दोस्ती को हमेशा निभाया था। पृथ्वीराज चौहान और उनके मित्र चन्द्रवरदाई की कहानी भी काफी प्रचलित है। दुनिया में मौजूद हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का दोस्त है, अगर यह भावना सभी लोगों में आ जाए तो सर्वे भवन्तु सुखिन की मूल भावना परिपूर्ण हो जाएगी।

    मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसे बंधन की आस होती है। यह बंधन प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी का होता है। दोस्ती भी एक विश्वास का बंधन है और जो सच्ची दोस्ती होती है, वह अटूट बंधन से युक्त होती है। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो उम्र के बंधनों से परे होता है। समाज में जीवन व्यतीत करते हुए कई व्यक्ति आपके संपर्क में आते है जिनमे कोई सच्चा होता है तो कोई झूठा। यह आप पर निर्भर है कि सच्चे दोस्त की परख कैसे करते है। जिस इंसान का सच्चा मित्र होता है तो वह भाग्यशाली है क्योंकि सच्ची मित्रता खुशनसीब लोगों को प्राप्त होती है। एक सच्चा और अच्छा मित्र आपको अच्छाई की ओर ले जाता है। एक सच्चा दोस्त आपकी हर संभव हर तरह से मदद करता है। सच्ची मित्रता में एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना होती है।

    बबीता मलिक

    प्रधानाचार्या केएलजी पब्लिक स्कूल शारदा नगर सहारनपुर।