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दीपावली से पहले उल्लुओं पर खतरा, अंधविश्वास के चलते शिकार किया तो लगेगा मोटा जुर्माना; जंगलों में हाई अलर्ट

Published: Fri, 06 Nov 2026 09:36 AM (IST)

दीपावली से पहले उल्लुओं के अवैध शिकार और तस्करी की आशंका के चलते सहारनपुर वन विभाग सतर्क हो गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. दीपावली से पहले उल्लुओं के शिकार पर वन विभाग सतर्क।

  2. अंधविश्वास के कारण बलि और तस्करी की आशंका बढ़ी।

  3. शिकारियों पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान।

दीपावली से पहले उल्लुओं पर मंडराया खतरा, अंधविश्वास के चलते जंगलों में हाई अलर्ट; शिकार पर मोटा जुर्माना

दीपक प्रजापति, सहारनपुर। दीपावली नजदीक आते ही घरों और बाजारों में रौनक बढ़ रही है। वहीं, उल्लुओं की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। भारतीय धार्मिक मान्यताओं में उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है।

दीपावली के आसपास अंधविश्वास के कारण इनके अवैध शिकार और तस्करी की आशंका रहती है। इसे देखते हुए वन विभाग ने जंगलों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। शिकारियों को रोकने के लिए रात में विशेष गश्त की जा रही है।

मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं

कुछ लोग उल्लू को धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर आती हैं। इसी विश्वास के चलते दीपावली के दौरान कुछ अंधविश्वासी लोग उल्लू की बलि देने या उसे अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं। इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन अंधविश्वास और लालच से उल्लुओं के अस्तित्व पर खतरा बना रहता है।

वन विभाग उन इलाकों पर खास नजर रख रहा है, जहां उल्लुओं की मौजूदगी की संभावना है। गश्ती दल रात में सक्रिय रहेंगे और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी करेंगे। वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए जंगलों में अनधिकृत आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।

सहारनपुर जिले की सीमा उत्तराखंड और हरियाणा के कलेसर नेशनल पार्क से मिलती है, इसलिए यहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है। तांत्रिक क्रिया के दौरान उल्लू के नाखून, बाल, खाल और आंख का इस्तेमाल किया जाता है।

25 हजार रुपये या उससे अधिक का जुर्माना

मोहंड रेंज के रेंजर लव सिंह ने बताया कि उल्लू संरक्षित पक्षी हैं। इनका शिकार करने, पकड़ने या मारने पर तीन साल से लेकर सात साल तक की जेल हो सकती है। दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यह गैर-जमानती श्रेणी का अपराध है, जिसमें वन विभाग और पुलिस सख्त कार्रवाई करती है। विभाग ने दिन और रात, दोनों समय गश्त बढ़ा दी है और शिकारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मोहंड रेंज में उल्लुओं की पांच प्रजातियां

सहारनपुर जिले में उल्लुओं की पांच प्रजातियां मुख्य रूप से पाई जाती हैं। इनमें से कुछ शहरी इलाकों में अक्सर दिखाई देते हैं। भारत में 13 किस्म के उल्लुओं की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।

यमुना के मैदानी इलाके और उससे सटे हिस्सों में उल्लुओं को अवैध तरीके से पकड़ा जाता है। जिन प्रजातियों की अधिक तस्करी देखी गई है, उनमें राक ईगल, ब्राउन फिश, डस्की ईगल, कालर्ड स्कोप्स और माटल्ड वूड शामिल हैं।

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