मोईन सिद्दीकी, देवबंद

करोड़ों लोगों की आस्था की प्रतीक ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रसिद्ध श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी की पावन शक्तिपीठ आदिकाल से देवबंद में स्थित है। मारकंडे पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में शक्तिपीठ का उल्लेख मिलता है। इस पावन शक्तिपीठ पर ही भारतीय शक-संवत के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी पर मेला लगता है। इस बार इस शक्तिपीठ पर 17 अप्रैल (कल) से मेला शुरू होगा। मां भवानी राज राजेश्वरी मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी मां महाशक्ति जगदम्बा का रूप हैं।

मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी द्वारा लक्ष्मी की आराधना से प्रसन्न होकर उनका उपनाम श्री अपने नाम से पहले धारण किए जाने से उन्हें मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी भगवती कहा जाता है। तंत्र सार के मुताबिक मां राजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी प्रात: कालीन सूर्यमंडल की आभा वाली हैं। इनके चार भुजा एवं तीन नेत्र हैं। वह अपने हाथ में पाश, धनुष-बाण और अंकुश लिए हैं तथा मस्तक पर बालचंद्र सुशोभित है। त्रिपुर बाला सुंदरी ने 105 ब्रहमांडों के अधिपति भंडासुर का वध किया। जबकि चौदह भुवन का एक ब्रहमांड होता है और एक ब्रहमांड में चौदह लोक होते हैं। मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी की उपासना करने वाले को भोग व मोक्ष दोनों प्राप्त होते है। देश के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं तथा मन्नतें मांगते हैं। मां बाला सुंदरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह लोगों में अटूट विश्वास बना हुआ है।

-शिलालेख है पौराणिकता का प्रमाण

शक्तिपीठ की पौराणिकता का प्रमाण मंदिर के निकासी द्वार पर लगे पत्थर के लेख से भी मिलता है। जिसमें अज्ञात भाषा उत्कीर्ण है। इस लेख को आज तक पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक भी नहीं पढ़ पाए हैं।

Posted By: Jagran

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