जहां अपमान हो ऐसे स्थान पर कदापि नहीं जाना चाहिए: आचार्य
सरसावा: आचार्य कुलदीप जी महाराज ने सती का शिव के साथ विवाह कराया और कहा कि दक्ष के यज्ञ में सती
सरसावा: आचार्य कुलदीप जी महाराज ने सती का शिव के साथ विवाह कराया और कहा कि दक्ष के यज्ञ में सती बिना निमंत्रण के शिव के बार-बार मना करने के बावजूद चली गई भगवान शिव ने सती को समझाया कि जहां निमंत्रण न हो वहां पर नही जाना चाहिए ¨कतु सती बिना निमंत्रण के चली गई जिससे शिव को अपमान सहना पड़ा। साथ में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी और दक्ष के अहंकार को तोड़कर बकरे का शीश लगाया।
चीनी मिल के परिसर मे स्थित श्री सनातन धर्म शिव मंदिर मे श्री शिव महापुराण कथा को सुनाते श्री आचार्य जी ने श्रद्धालुओं पर ज्ञानामृत वर्षा कर कथा रसपान कराते आध्यात्मिक ²ष्टि के तहत समझाते बताया कि हमें कदापि ऐसे स्थान पर नही जाना चाहिए जहां पर जाने से अपमान होता हो उन्होने बताया कि अहंकार मे मनुष्य अंधा हो जाता है और बकरे के समान मै मै करता है इसलिए भगवान शिव ने दक्ष को बकरे का शीश लगाया उन्होने बताया कि हमारे जीवन मे यदि काम क्रोध मद लोभ आ जाए तो हम पतन की ओर चले जाऐंगे इस लिए जिसने सरलता से ग्रस्त को निभा लिया उसने हर आश्रम को निभा लिया उदाहरण देते बताया कि जब सती सीता का वेश धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने पहुंची और उनके आगे आगे चलने लगी तब भगवान राम उन्हे पहचान लिया और प्रणाम किया तब सती बोली आप ने मुझे कैसे पहचाना तब भगवान राम मुस्कराए आचार्य ने बताया की माता सीता भगवान राम के आगे नही बल्कि उनके पीछे पीछे पग से पग मिला कर चलती थी स्त्रियों को हमेशा पति से विचार मिलाकर चलना चाहिए पतिव्रता ही उसका सबसे बड़ा धर्म है। पतिव्रता को संसार की हर वस्तु प्राप्त हो सकती है हमारी संस्कृति व देश के अनुसार स्त्रियां देवी समान होती है वह देश महान है जहां पर भगवान हमेशा वास करते हो। कथा से पूर्व आचार्य राहुल कृष्णन जी ने शिव महा पुराण की पूजा कराई पूजा मे राजेंद्र सैनी पत्नि मेमता, योगेश कुमार,बैजनाथ वर्मा, सुरेंद्र कुमार,सैनी,दर्शनी के अलावा आचार्य पुरूषोत्तम,आचार्य अर्श्वनी आचार्य रजनीश आचार्य विनय, आचार्य चंदन व पं आकाश वशिष्ठ आदि द्वारा विप्रो पूजा संपन्न कराई गई।
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